नेपाल सरकार ने माना सीमा पर जमीन कब्ज़ा रहा है चीन: जाँच समिति की रिपोर्ट से खुलासा, UN में दिया गया...

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ऑपइंडिया
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नेपाल सरकार ने माना सीमा पर जमीन कब्ज़ा रहा है चीन: जाँच समिति की रिपोर्ट से खुलासा, UN में दिया गया ज्ञापन
Feb 8th 2022, 09:09, by ऑपइंडिया स्टाफ़

नेपाल, चीन, भूमि अतिक्रमण

नेपाल ने अपनी सीमा में चीनी अतिक्रमण को लेकर भले ही चुप्पी साध रखी हो, लेकिन कई मीडिया रिपोर्ट इस तरफ इशारा करती रही है। अब नेपाल सरकार की एक रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में ने नेपाल ने चीन पर पश्चिमी नेपाल में अपनी साझा सीमा पर अतिक्रमण करने का आरोप लगाया गया है।

यह पहली बार है जब नेपाल ने अपने क्षेत्र में चीनी प्रभाव का आधिकारिक आरोप लगाया है। बता दें कि रिपोर्ट पिछले सितंबर में उन आरोपों के जवाब में पेश की गई थी जब खबर आई थी कि चीन नेपाल के सुदूर पश्चिम में हुमला जिले में घुसपैठ कर रहा है। नेपाल सरकार ने उस समय हुमला के उत्तरी हिस्से में स्थित नेपाल-चीन सीमा के संबंध में अध्ययन के लिए गृह सचिव के नेतृत्व में सात सदस्यीय समिति बनाई थी। नेपाल-चीन सीमा पर विवाद का अध्ययन करने के लिए गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में इस समिति का गठन किया गया था।

नेपाल की हिंदू सिविक सोसाइटी, राष्ट्रीय एकता अभियान ने सोमवार (7 फरवरी, 2022) को संयुक्त राष्ट्र को एक ज्ञापन सौंपा। एकता अभियान के चेयरपर्सन बिनय यादव ने काठमांडू में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर रिचर्ड हॉवर्ड को ज्ञापन सौंपा। जिसमें कहा गया है कि चीन ने हुमला जिले में उनकी भूमि पर कब्जा कर लिया है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से चीनी भूमि हथियाने पर ध्यान देने का आग्रह किया है। इसके साथ ही नागरिक समाज संगठन ने नेपाली कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार से समिति के सुझाव के अनुसार कार्रवाई करने का भी आग्रह किया है।

गौरतलब है कि चीन के नेपाल के अंदरूनी मामलों में लगातार हस्तक्षेप को लेकर पिछले दिनों नेपाल के सियासी तबकों से लेकर आम लोगों तक ने आवाज उठाई। इसको लेकर नेपाल के राष्ट्रीय एकता अभियान ने बिराटनगर, मोरंग और खाबरहुब में चीन के खिलाफ प्रदर्शन भी किया। देश के नागरिक समाज ने नेपाल के आंतरिक मामलों में चीन के हस्तक्षेप और उत्तरी सीमा के इलाके में अतिक्रमण का विरोध किया था।

विरोध प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय एकता अभियान के सदस्यों ने महेंद्र चौक से बिराटनगर के भट्टा चौक तक मार्च निकाला। साथ ही चीन की विस्तारवादी नीति और नेपाल के शीर्ष राजनीतिक क्षेत्र में इसके अनुचित हस्तक्षेप के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का पुतला भी फूँका।

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