दिल्ली सरकार के पर्यटन, संस्कृति एवं भाषा मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा है कि सत्ता के लिए भाजपा सियासी मर्यादा भी भूल चुकी है। जम्मू-कश्मीर में भाजपा-पीडीपी गठबंधन की सरकार बनाने की संभावना को लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को एक पत्र लिखा है।
इस पत्र में कपिल मिश्रा ने कहा है कि जिस दिन ये सरकार बनेगी, एक भारतीय नागरिक होने के नाते मैं काली पट्टी बांध कर दु:ख प्रदर्शित करूंगा।
मिश्रा ने पत्र में लिखा है, चर्चा है कि आप महबूबा मुफ्ती को जम्मू-कश्मीर का नया मुख्यमंत्री बनाने जा रहे हैं। एक आम हिंदुस्तानी के नाते मुझे लगता है कि पीडीपी से भाजपा जो ये समझौता करने जा रही है, इसकी देश को बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
कपिल ने आगे लिखा है कि जम्मू-कश्मीर को लेकर सियासी स्वार्थ सिद्धि से पहले देश का भला-बुरा सोचना ज्यादा जरूरी है। कपिल मिश्रा ने जम्मू-कश्मीर में गठबंधन सरकार बनाने को लेकर भाजपा अध्यक्ष से चार सवाल भी पूछे हैं-
पहला सवाल - क्या महबूबा मुफ्ती भारत माता की जय, कहने में यकीन रखतीं है? ऐसा नहीं कहती हैं तो क्या फिर भी भाजपा उनके साथ सरकार बनाएगी?
दूसरा सवाल - क्या महबूबा मुफ्ती कुर्सी पर बैठने से पहले, अफजल गुरु आतंकवादी था, अफजल गुरु मुर्दाबाद का नारा लगाएंगी? अगर नहीं, तो सरकार बनाने की बेचैनी की क्या मजबूरी है?
तीसरा सवाल - पाकिस्तान दिवस पर केंद्रीय मंत्री को पाकिस्तान उच्चायोग भेजा जाना क्या देश की साख को दुनिया के सामने कमजोर नहीं करता?
चौथा सवाल - पठानकोट हमले की जांच की अनुमति के लिए भी महबूबा मुफ्ती का दबाव ही कारण है?
इस पत्र में कपिल मिश्रा ने कहा है कि जिस दिन ये सरकार बनेगी, एक भारतीय नागरिक होने के नाते मैं काली पट्टी बांध कर दु:ख प्रदर्शित करूंगा।
मिश्रा ने पत्र में लिखा है, चर्चा है कि आप महबूबा मुफ्ती को जम्मू-कश्मीर का नया मुख्यमंत्री बनाने जा रहे हैं। एक आम हिंदुस्तानी के नाते मुझे लगता है कि पीडीपी से भाजपा जो ये समझौता करने जा रही है, इसकी देश को बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
कपिल ने आगे लिखा है कि जम्मू-कश्मीर को लेकर सियासी स्वार्थ सिद्धि से पहले देश का भला-बुरा सोचना ज्यादा जरूरी है। कपिल मिश्रा ने जम्मू-कश्मीर में गठबंधन सरकार बनाने को लेकर भाजपा अध्यक्ष से चार सवाल भी पूछे हैं-
पहला सवाल - क्या महबूबा मुफ्ती भारत माता की जय, कहने में यकीन रखतीं है? ऐसा नहीं कहती हैं तो क्या फिर भी भाजपा उनके साथ सरकार बनाएगी?
दूसरा सवाल - क्या महबूबा मुफ्ती कुर्सी पर बैठने से पहले, अफजल गुरु आतंकवादी था, अफजल गुरु मुर्दाबाद का नारा लगाएंगी? अगर नहीं, तो सरकार बनाने की बेचैनी की क्या मजबूरी है?
तीसरा सवाल - पाकिस्तान दिवस पर केंद्रीय मंत्री को पाकिस्तान उच्चायोग भेजा जाना क्या देश की साख को दुनिया के सामने कमजोर नहीं करता?
चौथा सवाल - पठानकोट हमले की जांच की अनुमति के लिए भी महबूबा मुफ्ती का दबाव ही कारण है?
