नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश में लखनऊ स्थित पांच सितारा होटल क्लार्क अवध के जनरल मैनेजर के खिलाफ 20 हजार रुपये के मुचलके पर जमानती वारंट जारी किया है।
सुनवाई के दौरान हाजिर न होने पर और कारण बताओ नोटिस का जवाब न देने के लिए एनजीटी ने यह निर्देश दिया है। वहीं, बेंच ने मुरादाबाद जिले में स्थित होटल रीजेंसी को भी कारण बताओ नोटिस दिया है। इन दोनों होटल पर याची ने अवैध तरीके से भूजल दोहन करने का आरोप लगाया है। मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी।
जस्टिस एमएस नांबियार कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने याची शैलेश सिंह के मामले की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। ग्रीन बेंच ने कहा कि होटल क्लार्क अवध की ओर से सुनवाई में कोई हाजिर नहीं हुआ है। ऐसा प्रतीत होता है कि बीती कई तारीखों पर भी होटल की ओर से प्रतिनिधित्व के तौर पर कोई जवाब देने नहीं आया। होटल की ओर से सुनवाई के दौरान मौजूदगी अनिवार्य ह्रै।
ग्रीन पैनल ने मुरादाबाद जिले में स्थित होटल रीजेंसी को कारण बताओ नोटिस देते हुए पूछा है कि बिना केंद्रीय भूजल प्राधिकरण के अनुमति के भूजल का दोहन करने के लिए आखिर होटल पर पर्यावरणीय जुर्माना क्यों न लगाया जाए। बेंच ने कहा कि होटल की ओर से पेश किए गए तथ्यों से साफ है कि वह बोरवेल के जरिये भूजल का दोहन कर रहा है।
मालूम हो कि याची व पर्यावरणविद शैलेश सिंह ने ग्रीन ट्रिब्युनल में याचिका दाखिल कर उत्तर प्रदेश के कई नामी-गिरामी होटलों पर अवैध तरीके से भू-जल दोहन का आरोप लगाया था। याची की दलील थी कि इन होटलों के जरिये� भूृ-जल दोहन के लिए संबंधित प्राधिकरण से जरूरी मंजूरी नहीं हासिल की गई है।
