नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने दिल्ली में रेलवे प्लेटफॉर्म और ट्रैक की सफाई में कोताही बरतने के लिए रेलवे बोर्ड पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
ट्रिब्युनल ने पर्यावरण प्रदूषण के लिए जिम्मेवार अन्य प्राधिकरणों में उत्तरी दिल्ली नगर निगम और दिल्ली शहरी आश्रय विकास एवं सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) पर भी एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
एनजीटी ने अपनी टिप्पणी में कहा कि रेलवे प्लेटफॉर्म और ट्रैक पर स्वच्छता के कई आदेश दिए हैं, इसके बावजूद एजेंसियां सचेत नहीं हुई हैं। यह पूरी तरह लापरवाही और इच्छा शक्ति की कमी का मामला है, जो दुखद है।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को सलोनी सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित मामलों में नियुक्त लोकल कमिश्नर की रिपोर्ट के बाद यह निर्देश दिया है।
लोकल कमिश्नर ने बेंच के सामने अपनी रिपोर्ट में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से लेकर सदर बाजार, सब्जी मंडी, आजादपुर और आदर्श नगर के हालात बयान किए। रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे ट्रैक पर जगह-जगह कचरे का अंबार लगा हुआ है।
ग्रीन बेंच ने मामले को दुखद बताया और कहा कि रेलवे व अन्य प्राधिकरण एक हफ्ते के भीतर जुर्माने की राशि अदा करें। यह रकम संबंधित विभागों के मुखिया से वसूली जाए। एनजीटी ने सभी प्राधिकरणों को चेताते हुए कहा कि यदि वे रेलवे परिक्षेत्र में सफाई रखने में विफल होते हैं तो भविष्य में ट्रिब्युनल बलपूर्वक उपायों पर भी विचार करेगा।
ट्रिब्युनल ने पर्यावरण प्रदूषण के लिए जिम्मेवार अन्य प्राधिकरणों में उत्तरी दिल्ली नगर निगम और दिल्ली शहरी आश्रय विकास एवं सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) पर भी एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
एनजीटी ने अपनी टिप्पणी में कहा कि रेलवे प्लेटफॉर्म और ट्रैक पर स्वच्छता के कई आदेश दिए हैं, इसके बावजूद एजेंसियां सचेत नहीं हुई हैं। यह पूरी तरह लापरवाही और इच्छा शक्ति की कमी का मामला है, जो दुखद है।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को सलोनी सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए संबंधित मामलों में नियुक्त लोकल कमिश्नर की रिपोर्ट के बाद यह निर्देश दिया है।
लोकल कमिश्नर ने बेंच के सामने अपनी रिपोर्ट में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से लेकर सदर बाजार, सब्जी मंडी, आजादपुर और आदर्श नगर के हालात बयान किए। रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे ट्रैक पर जगह-जगह कचरे का अंबार लगा हुआ है।
ग्रीन बेंच ने मामले को दुखद बताया और कहा कि रेलवे व अन्य प्राधिकरण एक हफ्ते के भीतर जुर्माने की राशि अदा करें। यह रकम संबंधित विभागों के मुखिया से वसूली जाए। एनजीटी ने सभी प्राधिकरणों को चेताते हुए कहा कि यदि वे रेलवे परिक्षेत्र में सफाई रखने में विफल होते हैं तो भविष्य में ट्रिब्युनल बलपूर्वक उपायों पर भी विचार करेगा।
