भारत में एड्स के मरीजों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है, लेकिन ट्रांसजेंडर और मेल सेक्स वर्कर्स ने चिकित्सकों और नीति निर्धारकों की चिंता बढ़ा दी है।
फीमेल सेक्स वर्कर्स और ब्लड ट्रांसफ्यूजन की वजह से आने वाले एड्स के मामलों में कमी आई है, लेकिन ट्रांसजेंडर और मेल सेक्स वर्कर्स में एड्स के मामले अधिक आ रहे हैं।
हालांकि पिछले 10 वर्षों में भारत में एड्स मरीजों की संख्या में करीब 10 लाख की कमी आई है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. संजय रॉय ने बताया कि एड्स मरीजों की संख्या में कमी आई है, लेकिन समलैंगिक मेल और ट्रांसजेंडर एड्स मरीजों की संख्या बढ़ाने के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार हैं।
वित्त वर्ष 2013-14 तक के कार्यक्रम में लगभग 7.18 लाख महिला यौनकर्मी और लगभग 2.59 लाख समलैंगिक पुरुष उच्च जोखिम समूह में शामिल हैं।
डॉ. रॉय ने बताया कि वर्ष-2005 में जहां भारत में करीब 28 लाख लोग एड्स से पीड़ित थे, वहीं वर्ष 2012-13 के आंकड़ों के मुताबिक भारत में एड्स पीड़ित मरीजों की संख्या घटकर करीब 21 लाख आ गई है।
