New political party may appear under the pretext of Lokpal Bill. / लोकपाल के बहाने फिर सियासी जमीन पर उतरेगी एक नई पार्टी

Ramandeep Kaur
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नई पार्टी बनाने की कगार पर खड़े योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण व उनके स्वराज अभियान के सहयोगी दिल्ली सरकार के प्रस्तावित लोकपाल बिल संजीवनी के तौर पर देख रहे हैं।

अभियान के रणनीतिकारों का मानना है कि लोकपाल आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार के लोकपाल बिल के विरोध से दोहरा फायदा हो सकता है।

प्रस्तावित बिल की खामियों पर वार करने से आप की साख गिर सकती है। वहीं, मजबूत लोकपाल कानून की मांग से निकली नई पार्टी लोगों में दोबारा उम्मीद पैदा करेगी।

दरअसल, आप से बाहर होने के बाद योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण व उनके सहयोगियों और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व उनकी पार्टी के आरोपो-प्रत्यारोपों को मुद्दों से ज्यादा निजी विरोध के तौर पर देखा गया।

यही वजह रही कि स्वराज अभियान के सहारे निष्कासित नेताओं ने किसान आंदोलन की राह पकड़ ली। पिछले करीब नौ महीनों में योगेंद्र यादव दो बार किसान यात्रा कर भी चुके हैं।

एक बार एनडीए सरकार के भूमि अधिग्रहण बिल के खिलाफ निकली यात्रा पंजाब से दिल्ली के बीच थी। तो दूसरी में कर्नाटक से हरियाणा के बीच सूखा प्रभावित किसानों से योगेंद्र यादव ने मुलाकात की। वहीं, बुंदेलखंड इलाके के किसानों का दर्द टटोलने वाला एक सर्वे भी किया।


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