विधानसभा सत्र में सोमवार को दंड प्रक्रिया संहिता (दिल्ली संशोधन) विधेयक, 2015 पर चर्चा हुई। इसमें सत्तापक्ष से कानून की डिग्री धारक विधायक संशोधन की पैरवी में उतरे। चर्चा की शुरुआत मदनलाल ने की।
वहीं नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने संशोधन विधेयक को दिल्ली पुलिस को नियंत्रण में लेने की कड़ी का एक हिस्सा करार दिया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार विधायी और कार्यकारी नियंत्रण में पुलिस को लाना चाहती है।
मदनलाल ने कहा कि अभी ऐसे मामलों में चार्जशीट भी मुश्किल से दाखिल होती है, जिसमें पुलिस लिप्त हो। आनंद पर्वत में युवती की शिकायत के बावजूद कार्रवाई न करने पर हत्या, सुनंदा पुष्कर की संदेहास्पद मौत समेत कई मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस हिरासत में संदेहास्पद मौत, दुष्कर्म की वारदात की जांच तीसरे पक्ष से कराई जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस कोर्ट में केस को ठीक से नहीं ले जाती।
वहीं पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती ने कहा कि जब शीला दीक्षित की सरकार थी तो रेप की घटना को लेकर हम लोग चिंतित थे। सरकार बनी तो पीड़ा हुई, लेकिन कुछ नहीं कर सकते।
यही वजह है कि संशोधन लाए हैं, ताकि हमें शीला दीक्षित की तरह अक्षम न कहा जाए। हमारे पास पुलिस नहीं है, लेकिन सदन तो है। कैलाश गहलोत ने कहा कि रोजाना 18 बच्चे गुम हो रहे हैं, जिसमें 53 फीसदी लड़कियां हैं। दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ रही हैं। सरकार के पास अधिकार नहीं है।
राजेंद्र गौतम ने कहा कि समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए दिल्ली विधानसभा को संशोधन का अधिकार है। जब भी पुलिस पर आरोप लगता है तो प्राकृतिक न्याय को लेकर संदेह बना रहता है।
नंद नगरी पुलिस कस्टडी में शहनवाज की मौत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कोर्ट ने दोषी पुलिसकर्मी को चिन्हित कर निलंबित करने का आदेश दिया, लेकिन अभी तक आदेश को अमल में नहीं लाया गया। सरकार को मजिस्ट्रेट जांच का अधिकार मिलने से पुलिस पर चेक एंड बैलेंस का दबाव बनेगा।
वहीं नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने संशोधन विधेयक को दिल्ली पुलिस को नियंत्रण में लेने की कड़ी का एक हिस्सा करार दिया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार विधायी और कार्यकारी नियंत्रण में पुलिस को लाना चाहती है।
मदनलाल ने कहा कि अभी ऐसे मामलों में चार्जशीट भी मुश्किल से दाखिल होती है, जिसमें पुलिस लिप्त हो। आनंद पर्वत में युवती की शिकायत के बावजूद कार्रवाई न करने पर हत्या, सुनंदा पुष्कर की संदेहास्पद मौत समेत कई मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस हिरासत में संदेहास्पद मौत, दुष्कर्म की वारदात की जांच तीसरे पक्ष से कराई जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस कोर्ट में केस को ठीक से नहीं ले जाती।
वहीं पूर्व कानून मंत्री सोमनाथ भारती ने कहा कि जब शीला दीक्षित की सरकार थी तो रेप की घटना को लेकर हम लोग चिंतित थे। सरकार बनी तो पीड़ा हुई, लेकिन कुछ नहीं कर सकते।
यही वजह है कि संशोधन लाए हैं, ताकि हमें शीला दीक्षित की तरह अक्षम न कहा जाए। हमारे पास पुलिस नहीं है, लेकिन सदन तो है। कैलाश गहलोत ने कहा कि रोजाना 18 बच्चे गुम हो रहे हैं, जिसमें 53 फीसदी लड़कियां हैं। दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ रही हैं। सरकार के पास अधिकार नहीं है।
राजेंद्र गौतम ने कहा कि समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए दिल्ली विधानसभा को संशोधन का अधिकार है। जब भी पुलिस पर आरोप लगता है तो प्राकृतिक न्याय को लेकर संदेह बना रहता है।
नंद नगरी पुलिस कस्टडी में शहनवाज की मौत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कोर्ट ने दोषी पुलिसकर्मी को चिन्हित कर निलंबित करने का आदेश दिया, लेकिन अभी तक आदेश को अमल में नहीं लाया गया। सरकार को मजिस्ट्रेट जांच का अधिकार मिलने से पुलिस पर चेक एंड बैलेंस का दबाव बनेगा।
