स्कूल में खेलने के दौरान चोट लगकर मौत का शिकार बनने वाले 16 साल के बच्चे के परिजनों ने स्कूल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों ने कहा है कि चोट लगने के बाद स्कूल प्रशासन ने बच्चे की कोई मदद नहीं की।
पुलिस के मुताबिक बच्चे का नाम शक्ति था। वह जनकपुर K-ब्लॉक स्थित सीनियर सेकेंडरी सरकारी स्कूल में पढ़ता था। मंगलवार को छठे पीरियड़ के लिए क्लास में शिक्षक नहीं पहुंचे तो बच्चों ने क्लास में ही खेलना शुरु कर दिया।
शक्ति जब डेस्क पर उपर चढ़ा और उसका पैर फिसल गया। वह नीचे गिरा तो उसका सिर डेस्क में लगा। चोट लगने के बाद शक्ति बेहोश था। उसके दोस्तों ने उसे जगाने की कोशिश की।
लेकिन जब वे कुछ नहीं कर सके तो उन्होंने शिक्षकों को बुलाया। शक्ति के परिजनों का आरोप है कि शिक्षकों ने बच्चे की मदद करने की कोशिश तक नहीं की।
शक्ति के चाचा रवि ने बताया कि अध्यापकों ने समझा कि बच्चे पर हमला हुआ है। इसके बाद छात्र शक्ति को लाइब्रेरी लेकर गए, जहां उसे एक बेंच पर लेटाया गया और उसे जगाने की कोशिश की।
लेकिन जब कोई रास्ता नहीं बचा तो छात्रों ने उसे पास के ही बाबु जगजीवन राम अस्पताल में भर्ती करवाया। इस समय तक 45 मिनट घटना को बीत चुके थे। अस्पताल प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की सूचना पुलिस को दी।
जिसके बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ धारा 304-ए ( लपरवाही के कारण मौत) का मामला दर्ज कराया। परिजनों के अनुसार उन्हें स्कूल प्रशासन और पुलिस दोनों ने घटना की कोई सूचना नहीं दी।
इनके बजाय उन्हें शक्ति के एक दोस्त से फोन पर घटना की जानकारी मिली। डॉक्टरों ने शक्ति के परिजनों को बताया कि रीढ़ की हड्डी में गर्दन के हिस्से में आघात हुआ जिससे श्वास नली पर असर पड़ा।
यह एक गंभीर घटना थी। लेकिन अध्यापकों ने न ही शक्ति की मदद की और न ही पुलिस को बुलाया। ऐसे में उसे समय पर कौन अस्पताल पहुंचाता।
पुलिस के मुताबिक बच्चे का नाम शक्ति था। वह जनकपुर K-ब्लॉक स्थित सीनियर सेकेंडरी सरकारी स्कूल में पढ़ता था। मंगलवार को छठे पीरियड़ के लिए क्लास में शिक्षक नहीं पहुंचे तो बच्चों ने क्लास में ही खेलना शुरु कर दिया।
शक्ति जब डेस्क पर उपर चढ़ा और उसका पैर फिसल गया। वह नीचे गिरा तो उसका सिर डेस्क में लगा। चोट लगने के बाद शक्ति बेहोश था। उसके दोस्तों ने उसे जगाने की कोशिश की।
लेकिन जब वे कुछ नहीं कर सके तो उन्होंने शिक्षकों को बुलाया। शक्ति के परिजनों का आरोप है कि शिक्षकों ने बच्चे की मदद करने की कोशिश तक नहीं की।
शक्ति के चाचा रवि ने बताया कि अध्यापकों ने समझा कि बच्चे पर हमला हुआ है। इसके बाद छात्र शक्ति को लाइब्रेरी लेकर गए, जहां उसे एक बेंच पर लेटाया गया और उसे जगाने की कोशिश की।
लेकिन जब कोई रास्ता नहीं बचा तो छात्रों ने उसे पास के ही बाबु जगजीवन राम अस्पताल में भर्ती करवाया। इस समय तक 45 मिनट घटना को बीत चुके थे। अस्पताल प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की सूचना पुलिस को दी।
जिसके बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ धारा 304-ए ( लपरवाही के कारण मौत) का मामला दर्ज कराया। परिजनों के अनुसार उन्हें स्कूल प्रशासन और पुलिस दोनों ने घटना की कोई सूचना नहीं दी।
इनके बजाय उन्हें शक्ति के एक दोस्त से फोन पर घटना की जानकारी मिली। डॉक्टरों ने शक्ति के परिजनों को बताया कि रीढ़ की हड्डी में गर्दन के हिस्से में आघात हुआ जिससे श्वास नली पर असर पड़ा।
यह एक गंभीर घटना थी। लेकिन अध्यापकों ने न ही शक्ति की मदद की और न ही पुलिस को बुलाया। ऐसे में उसे समय पर कौन अस्पताल पहुंचाता।
