Gandicapped criminal reaches fifth floor of court room by crawling / हाथों पर रेंगता कोर्ट पहुंचा विकलांग आरोपी

Swati
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अदालत में पेशी के लिए गए विकलांग आरोपी को पांचवी मंजिल पर मौजूद कोर्टरूम तक रेंग कर पहुंचना पड़ा। जब यह आरोपी कोर्टरूम में पहुंचा तो जज भी उसका ये हाल देखकर हैरान रह गए।

आरोपी के ऐसा करने की वजह ये रही कि दिल्ली पुलिस ने उसके लिए व्हीलचेयर का प्रबंध ‌नहीं किया था। गौरतलब है कि आरोपी यामीन मलिक हैंडिकैप्ड है।

यामीन एक ना‌बालिग से रेप का आरोपी है। दिल्ली में सोमवार को उसके इसी केस की सुनवाई थी जिसके लिए उसे पांचवीं मंजिल पर स्थित कोर्टरूम तक रेंग कर जाना पड़ा।

यामीन को रेंगता हुआ आता देखकर एडिशनल सेशन जज संजय शर्मा ने तुरंत वहां मौजूद जांच अधिकारी से पूछा- हैंडिकैप्ड आरोपियों की पेशी के लिए जेल लॉक-अप में व्हीलचेयर की सुविधा उपलब्ध है? जांच अधिकारी इस सवाल का कोई जवाब नहीं दे पाया।

जज ने कहा, 'आरोपी का यह हाल देख कर कोर्ट हैरान है, जो अपने हाथों से रेंगता हुआ पहुंचा है। उसे व्हीलचेयर नहीं दी गई है। इसका मतलब तो ये हुआ कि जेल से लेकर यहां पांचवी फ्लोर पर बने कोर्ट रूम तक वह रेंगता हुआ ही आया है। यह बहुत दुखदायी है।'

कोर्ट ने यह भी कहा है कि ऐसा लगता है कि 27 जुलाई 2015 को भी जब उसे गिरफ्तार किया गया था उस वक्त भी उसे ऐसे ही पेशी के लिए लाया गया था।

जज ने कहा, 'कोर्ट की यह राय है कि जब हैंडिकैप्ड आरोपी को गिरफ्तार किया गया, पुलिस ने थाने में डाला, पहली बार जब कोर्ट में पेश किया गया, जेल से वैन और फिर कड़कड़डूमा कॉम्प्लेक्स में लाया गया, इन सभी मौकों पर उसे व्हीलचेयर नहीं दी गई।'

कोर्ट ने आगे कहा कि 'यह संवेदनशीलता की कमी का मामला है। इसमें हैंडिकैप्ड आरोपियों के अधिकारों का मुद्दा उठता है।'

कोर्ट यह मानती है कि हैंडिकैप्ड आरोपियों को न्याय प्रक्रिया में समान हक है। सोमवार को अपने एक आदेश में कोर्ट ने कहा, 'यह राज्य का दायित्व है कि न्यायिक प्रक्रिया को ऐसे व्यक्तियों की पहुंच के दायरे में लाए, ताकि हैंडिकैप्ड होना इंसाफ पाने में कोई बाधा न बने।'

इस घटना के बाद जज ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर और जेल के डायरेक्टर जनरल से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। पूछा गया है कि अगर एक हैंडिकैप्ड आरोपी को जेल में पेश करना है तो इसके लिए क्या प्रावधान हैं।

अदालत ने पुलिस कमिश्नर से यह भी पूछा है कि सभी पुलिस स्टेशनों और जेल कोठरी में हैंडिकैप्ड आरोपियों के लिए व्हीलचेयर है या नहीं? क्या व्हीलचेयर देने के लिए पुलिस कमिश्नर की ओर से कोई आदेश दिया गया है?

कोर्ट ने यह भी पूछा है कि पुलिस स्टेशनों में हैंडिकैप्ड आरोपियों के लिए स्पेशल टॉयलेट है या नहीं? तिहाड़ जेल के डीजी से भी कोर्ट ने यही सवाल पूछे हैं। पुलिस और जेल प्रशासन की ओर से गुरुवार को जवाब दाखिल किया जा सकता है।

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