अभिभावकों ने नहीं किया सहयोग: चाइल्ड हेल्प लाइन की डायरेक्टर अंजू बाजपेयी ने बताया कि करीब 10 दिन पहले स्कूल की टीचर ने उनको फोन किया और बच्चियों का मेडिकल करवाने की बात कही थी। हमने गांव में जाकर पूछताछ की तो बच्चियों के अभिभावकों ने� सहयोग नहीं किया। उल्टा, उन्होंने बच्चियों को स्कूल भेजना बंद कर दिया।
जांच में सामने आया कि स्कूल की चार बच्चियों के साथ दुराचार हुआ है और तीन के साथ छेड़छाड़ हुई है। दूसरी बच्चियों के साथ भी छेड़छाड़ की संभावना पर जांच की जा रही है।
पैसे देकर करता रहा यौन शोषण: जिन बच्चियों के साथ यौन शोषण हुआ है, वे पांच से नौ साल की उम्र की और नर्सरी से चौथी कक्षा तक में पढ़ती हैं। आरोपी से पैसे लेने के बाद कुछ बच्चियां तो अपने साथ दूसरी बच्ची को यह कहकर ले जाती थीं कि अंकल पैसे देंगे। दुराचार का शिकार हुई एक बच्ची के प्राइवेट पार्ट से कई दिनों तक ब्लीडिंग होती रही।
कहा तो ये भी जा रहा है कि मामला सामने आने के बाद गांव में पंचायत भी हुई, लेकिन बच्चियों के परिवार वाले गरीब और दूसरे प्रदेश के होने के कारण यह मामला दबा दिया गया। अब भी बच्चियों के अभिभावक खामोश हैं। उन्होंने अपनी बच्चियों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। स्कूल में 150 से अधिक छोटी बच्चियां पढ़ती हैं।
राजेंद्र कुमार, डीएसपी जगाधरी ने बताया कि शिकायत मिलने पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ यौनाचार का मामला दर्ज कर लिया गया है। बच्चियों के साथ दुराचार हुआ है या नहीं, इसकी जांच की जा रही है।
11 साल पुराने बुडै़ल जेल ब्रेक केस में मंगलवार को सीजेएम अनुभव शर्मा की कोर्ट ने 14 आरोपियों को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया। वहीं जेल से फरार होने वालों में जगतार सिंह हवारा और परमजीत सिंह भ्यौरा की सजा को अंडरगॉन (ट्रायल के दौरान सजा पूरी करना) कर दिया।
दोनों बब्बर खालसा इंटरनेशनल के सदस्य थे। इनमें जगतार सिंह हवारा ग्रुप का चीफ और परमजीत सिंह भ्यौरा ऑपरेशन चीफ था। कोर्ट ने हवारा और भ्यौरा के बारे में कहा कि दोनों ने इस अपराध में ट्रायल के दौरान ही सजा पूरी कर ली है।
ये हुए बरी: मामले में कुल 21 आरोपी थे। बरी होने वालों में जेल के तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट डीएस राणा, डिप्टी जेल सुपरिंटेंडेंट दलबीर सिंह संधू, असिस्टेंट जेल सुपरिंटेंडेंट वेद मित्तल गिल और पीएस राणा, वार्डर इंद्र सिंह, हवलदार निशान सिंह सहित नारायण सिंह चौरा, नंद सिंह, शेर सिंह, लखविंदर सिंह, गुरदीप सिंह, सुबेग सिंह, गुरनाम सिंह और एसपी सिंह शामिल हैं।
कोर्ट ने जगतार सिंह तारा, गुरविंदर सिंह गोल्डी और देवी सिंह को भगोड़ा करार दिया है। 21 आरोपियों में से छह पुलिसकर्मी, दो सीआरपीएफ के कर्मचारी, एक पाकिस्तानी जासूस आबिद मोहम्मद भी शामिल थे। आबिद जासूसी मामले में पहले ही सजा पूरी कर चुका था। इसके बाद उसे वतन वापस भेज दिया गया। कुल 21 आरोपियों में एक महिला बलजीत कौर भी आरोपी थी। हालांकि उसकी ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है।
जांच में सामने आया कि स्कूल की चार बच्चियों के साथ दुराचार हुआ है और तीन के साथ छेड़छाड़ हुई है। दूसरी बच्चियों के साथ भी छेड़छाड़ की संभावना पर जांच की जा रही है।
पैसे देकर करता रहा यौन शोषण: जिन बच्चियों के साथ यौन शोषण हुआ है, वे पांच से नौ साल की उम्र की और नर्सरी से चौथी कक्षा तक में पढ़ती हैं। आरोपी से पैसे लेने के बाद कुछ बच्चियां तो अपने साथ दूसरी बच्ची को यह कहकर ले जाती थीं कि अंकल पैसे देंगे। दुराचार का शिकार हुई एक बच्ची के प्राइवेट पार्ट से कई दिनों तक ब्लीडिंग होती रही।
कहा तो ये भी जा रहा है कि मामला सामने आने के बाद गांव में पंचायत भी हुई, लेकिन बच्चियों के परिवार वाले गरीब और दूसरे प्रदेश के होने के कारण यह मामला दबा दिया गया। अब भी बच्चियों के अभिभावक खामोश हैं। उन्होंने अपनी बच्चियों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। स्कूल में 150 से अधिक छोटी बच्चियां पढ़ती हैं।
राजेंद्र कुमार, डीएसपी जगाधरी ने बताया कि शिकायत मिलने पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ यौनाचार का मामला दर्ज कर लिया गया है। बच्चियों के साथ दुराचार हुआ है या नहीं, इसकी जांच की जा रही है।
11 साल पुराने बुडै़ल जेल ब्रेक केस में मंगलवार को सीजेएम अनुभव शर्मा की कोर्ट ने 14 आरोपियों को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया। वहीं जेल से फरार होने वालों में जगतार सिंह हवारा और परमजीत सिंह भ्यौरा की सजा को अंडरगॉन (ट्रायल के दौरान सजा पूरी करना) कर दिया।
दोनों बब्बर खालसा इंटरनेशनल के सदस्य थे। इनमें जगतार सिंह हवारा ग्रुप का चीफ और परमजीत सिंह भ्यौरा ऑपरेशन चीफ था। कोर्ट ने हवारा और भ्यौरा के बारे में कहा कि दोनों ने इस अपराध में ट्रायल के दौरान ही सजा पूरी कर ली है।
ये हुए बरी: मामले में कुल 21 आरोपी थे। बरी होने वालों में जेल के तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट डीएस राणा, डिप्टी जेल सुपरिंटेंडेंट दलबीर सिंह संधू, असिस्टेंट जेल सुपरिंटेंडेंट वेद मित्तल गिल और पीएस राणा, वार्डर इंद्र सिंह, हवलदार निशान सिंह सहित नारायण सिंह चौरा, नंद सिंह, शेर सिंह, लखविंदर सिंह, गुरदीप सिंह, सुबेग सिंह, गुरनाम सिंह और एसपी सिंह शामिल हैं।
कोर्ट ने जगतार सिंह तारा, गुरविंदर सिंह गोल्डी और देवी सिंह को भगोड़ा करार दिया है। 21 आरोपियों में से छह पुलिसकर्मी, दो सीआरपीएफ के कर्मचारी, एक पाकिस्तानी जासूस आबिद मोहम्मद भी शामिल थे। आबिद जासूसी मामले में पहले ही सजा पूरी कर चुका था। इसके बाद उसे वतन वापस भेज दिया गया। कुल 21 आरोपियों में एक महिला बलजीत कौर भी आरोपी थी। हालांकि उसकी ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है।
