एम्स के पूर्व सीवीओ और आईएफएस संजीव चतुर्वेदी का कैडर अब हरियाणा से उत्तराखंड हो गया है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली एसीसी (अपाइंटमेंट कमेटी ऑफ कैबिनेट) ने इसे मंजूरी दी है।
संजीव ने कोर्ट में अपना कैडर हरियाणा से बदलकर उत्तराखंड करने की मांग की थी। संजीव चतुर्वेदी ने अपने ट्रांस्फर पर कहा है कि इस फैसले से वे खुश हैं, उन्हें कोर्ट के सख्त रवैये के बाद ही सफलता मिली है।
बता दें कि जनवरी में एसीसी ने संजीव की ट्रांस्फर अर्जी पर हरियाणा और उत्तराखंड से राय मांगने की बाद कही थी। जिसके बाद मामले को लेकर संजीव कोर्ट पहुंचे थे।
जिसके चलते कैट यानि सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल ने एसीसी के आदेश पर रोक लगा दी। कैट ने कड़े शब्दों में कहा था कि अदालत के दरवाजे हमेशा संजीव चतुर्वेदी के लिए खुले हैं।
संजीव चतुर्वेदी ने हरियाणा में अपने कार्यकाल के दौरान कई भ्रष्टाचार के मामले उजागर किए थे। इसके लिए कांग्रेस की हुड्डा सरकार से उन्हें काफी प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था।
जिसके चलते संजीव ने अपनी जान का खतरा बताते हुए 2012 में अपना काडर हरियाणा से बदलने की मांग की थी। एम्स से भी उन्हें सीवीओ के पद से हटा दिया गया था।
संजीव ने कोर्ट में अपना कैडर हरियाणा से बदलकर उत्तराखंड करने की मांग की थी। संजीव चतुर्वेदी ने अपने ट्रांस्फर पर कहा है कि इस फैसले से वे खुश हैं, उन्हें कोर्ट के सख्त रवैये के बाद ही सफलता मिली है।
बता दें कि जनवरी में एसीसी ने संजीव की ट्रांस्फर अर्जी पर हरियाणा और उत्तराखंड से राय मांगने की बाद कही थी। जिसके बाद मामले को लेकर संजीव कोर्ट पहुंचे थे।
जिसके चलते कैट यानि सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल ने एसीसी के आदेश पर रोक लगा दी। कैट ने कड़े शब्दों में कहा था कि अदालत के दरवाजे हमेशा संजीव चतुर्वेदी के लिए खुले हैं।
संजीव चतुर्वेदी ने हरियाणा में अपने कार्यकाल के दौरान कई भ्रष्टाचार के मामले उजागर किए थे। इसके लिए कांग्रेस की हुड्डा सरकार से उन्हें काफी प्रताड़ना का सामना करना पड़ा था।
जिसके चलते संजीव ने अपनी जान का खतरा बताते हुए 2012 में अपना काडर हरियाणा से बदलने की मांग की थी। एम्स से भी उन्हें सीवीओ के पद से हटा दिया गया था।
