नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 10 साल पुराने डीजल वाहनों पर बैन हटाने से मना कर दिया है। बेंच ने कहा कि संबंधित विभाग और प्राधिकरण तय करें कि उन्हें इस मामले में क्या करना है।
बेंच के मुताबिक प्रतिबंध के ऑर्डर को बदला नहीं जा सकता। गौरतलब है कि ट्रांसपोर्ट मंत्रालय और संबंधित विभाग ने जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ से लगाई गुहार थी।
इसमें 10 साल पुराने डीजल वाहनों पर लगाए गए बैन के खिलाफ अपील की गई थी।
एडीशनल सॉलिसीटर जनरल पिंकी आनंद ने बुधवार को ग्रीन बेंच से कहा कि 10 साल डीजल वाहनों के बैन ऑर्डर से जरूरत वाले समान के परिवहन में परेशानी हो रही है।
वाहनों से बैन हटाने के लिए दलील दी गई कि बैन के चलते दूध, फल, सब्जियों और अन्य जरूरत के सामान को ढोने और वहन करने वाले डीजल वाहनों की शॉर्टेज हो रही है।
हालांकि इस दलील का न तो बेंच पर असर हुआ और न ही अंतिम फैसले पर कोई प्रभाव पड़ा। बेंच ने इस पर कहा कि हम सुनवाई तक स्टे नहीं हटा सकते।
बेंच के मुताबिक प्रतिबंध के ऑर्डर को बदला नहीं जा सकता। गौरतलब है कि ट्रांसपोर्ट मंत्रालय और संबंधित विभाग ने जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ से लगाई गुहार थी।
इसमें 10 साल पुराने डीजल वाहनों पर लगाए गए बैन के खिलाफ अपील की गई थी।
एडीशनल सॉलिसीटर जनरल पिंकी आनंद ने बुधवार को ग्रीन बेंच से कहा कि 10 साल डीजल वाहनों के बैन ऑर्डर से जरूरत वाले समान के परिवहन में परेशानी हो रही है।
वाहनों से बैन हटाने के लिए दलील दी गई कि बैन के चलते दूध, फल, सब्जियों और अन्य जरूरत के सामान को ढोने और वहन करने वाले डीजल वाहनों की शॉर्टेज हो रही है।
हालांकि इस दलील का न तो बेंच पर असर हुआ और न ही अंतिम फैसले पर कोई प्रभाव पड़ा। बेंच ने इस पर कहा कि हम सुनवाई तक स्टे नहीं हटा सकते।
