अपने जिगर के टुकड़े को खोने और उसके अंगों को दूसरों के लिए दान करने के बाद एक मां ने अंगदान कराने के लिए लोगों को प्रेरित करने का जिम्मा उठाया है।
दिल्ली में कई जगहों पर पोस्टर लगाकर अपनी दिवंगत बेटी की तस्वीर लगाई है और उस पर अपना मोबाइल नंबर लिखा है और लोगों से अंगदान करने की अपील कर रही हैं।
दिल्ली में ऐसे कुछ परिवार हैं जिन्होंने अपनों के शरीर को दूसरों के लिए दान किया है और अब अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के साथ मिलकर अंगदान को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं।
एम्स के ऑर्गन रिट्रीवल बैंकिंग ऑर्गेनाइजेशन (ऑर्बो) के साथ मिलकर दिल्ली के चार परिवार अंगदान को बढ़ावा देने के लिए अपने-अपने स्तर से कार्य कर रहे हैं।
ये चारों परिवार ऐसे हैं जिन्होंने अपनों की मौत के बाद उनके अंगों को एम्स में किसी दूसरे जरूरतमंद के लिए दान किया। एम्स इन परिवारों की ओर से किये जा रहे कार्य से बेहद प्रभावित हैं और इनके अपनों की तस्वीर एम्स में प्रेरणास्रोत लगाई है।
2013 में अपनी 17 वर्ष की बेटी सुरभि को खोने के बाद उनकी मां सीमा विंदल ने निर्णय लिया कि बेटी को जिंदा रखना है और उसके अंगों को दूसरों के जीवन के लिए दान कर दिया।
इस घटना के बाद उन्होंने अंगदान के लिए अंबेस्डर बनने का मन बना लिया। अपने घर और सुरभि के स्कूल में पोस्टर लगवाए और उन पर अपना नाम व मोबाइल नंबर भी लिखा।
इसके लिए एम्स के ऑर्बो से अंगदान के लिए शपथ फॉर्म भी लिए और लोगों से भरवा रहीं हैं। सीमा विंदल ने कहा कि अभी उनका बेटा बहुत छोटा है इसलिए पूरा समय नहीं दे पा रही हूं, बेटे के बड़े होती है पूरी तरह से इस कार्य में लग जाऊंगी।
दिल्ली के गौतम नगर में रहने वाली मांसी जैन ने बताया कि मां आशा जैन (65) की कार्डिएक अरेस्ट के बाद ब्रेन डेड होने की स्थिति में उनके अंगों को दान करने का निर्णय लिया था।
