11 साल पुराने बुडै़ल जेल ब्रेक केस में मंगलवार को सीजेएम अनुभव शर्मा की कोर्ट ने 14 आरोपियों को सुबूतों के अभाव में बरी कर दिया। वहीं जेल से फरार होने वालों में जगतार सिंह हवारा और परमजीत सिंह भ्यौरा की सजा को अंडरगॉन (ट्रायल के दौरान सजा पूरी करना) कर दिया।
दोनों बब्बर खालसा इंटरनेशनल के सदस्य थे। इनमें जगतार सिंह हवारा ग्रुप का चीफ और परमजीत सिंह भ्यौरा ऑपरेशन चीफ था। कोर्ट ने हवारा और भ्यौरा के बारे में कहा कि दोनों ने इस अपराध में ट्रायल के दौरान ही सजा पूरी कर ली है।
ये हुए बरी: मामले में कुल 21 आरोपी थे। बरी होने वालों में जेल के तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट डीएस राणा, डिप्टी जेल सुपरिंटेंडेंट दलबीर सिंह संधू, असिस्टेंट जेल सुपरिंटेंडेंट वेद मित्तल गिल और पीएस राणा, वार्डर इंद्र सिंह, हवलदार निशान सिंह सहित नारायण सिंह चौरा, नंद सिंह, शेर सिंह, लखविंदर सिंह, गुरदीप सिंह, सुबेग सिंह, गुरनाम सिंह और एसपी सिंह शामिल हैं।
कोर्ट ने जगतार सिंह तारा, गुरविंदर सिंह गोल्डी और देवी सिंह को भगोड़ा करार दिया है। 21 आरोपियों में से छह पुलिसकर्मी, दो सीआरपीएफ के कर्मचारी, एक पाकिस्तानी जासूस आबिद मोहम्मद भी शामिल थे। आबिद जासूसी मामले में पहले ही सजा पूरी कर चुका था। इसके बाद उसे वतन वापस भेज दिया गया। कुल 21 आरोपियों में एक महिला बलजीत कौर भी आरोपी थी। हालांकि उसकी ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है।
जेल से 2004 में हुए थे फरार: 21/22 जनवरी 2004 में हवारा, भ्यौरा, तारा और हत्या केस में एक दोषी देवी सिंह करीब 94 फीट लंबी सुरंग खोदकर कर फरार हो गए थे। हवारा और भ्यौरा को फरार होने के 2 वर्ष बाद गिरफ्तार कर लिया गया था। जबकि तारा को इसी साल थाईलैंड से गिरफ्तार किया गया था। देवी सिंह के पाकिस्तान में छिपे होने के संकेत हैं। जेल अधिकारियों सहित कुछ आरोपियों पर जेल ब्रेक में लापरवाही और सहयोग का आरोप था।
1995 में किया था ब्लास्ट: 31 अगस्त, 1995 को पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह की पंजाब सिविल सचिवालय भवन के पास बम ब्लास्ट में हत्या कर दी गई थी। इस ब्लास्ट में 17 अन्य लोगों की भी मौत हुई थी। केएलएफ के दिलवार सिंह जयसिंहवाला ने यह आत्मघाती हमला किया था। मामले में बब्बर खालसा इंटरनेशनल के सदस्य जगतार सिंह हवारा, परमजीत सिंह भ्यौरा, जगतार सिंह तारा को गिरफ्तार किया था।
तीनों बुड़ैल जेल में बंद थे। जेल से फरार होने के बाद देवी सिंह को छोड़ तीनों कैदियों को पुलिस पकड़ चुकी है। वहीं जेल ब्रेक में लापरवाही बरतने वाले जेल कर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ सेक्टर-34 पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया था। बेअंत सिंह हत्याकांड में हवारा और भ्यौरा को उम्रकैद की सजा सुनाई जा सुकी है। जबकि तारा का बेअंत सिंह हत्याकांड में ट्रायल अधूरा रहा और जेल ब्रेक में फिर से ट्रायल शुरू होना है।
दिल्ली पुलिस ने किया था गिरफ्तार: बुड़ैल जेल से फरार होने के बाद आतंकी जगतार सिंह हवारा, परमजीत सिंह भ्यौरा को कुछ महीने बाद दिल्ली पुलिस ने वहां एक सिनेमा हॉल में बम ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार किया था। बम ब्लास्ट मामले की सुनवाई के कारण दोनों आतंकियों को तिहाड़ जेल में शिफ्ट किया गया है। वहीं जगतार सिंह तारा को इस साल पंजाब पुलिस ने थाईलैंड से गिरफ्तार किया था। जबकि देवी सिंह को आज तक पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है
दोनों बब्बर खालसा इंटरनेशनल के सदस्य थे। इनमें जगतार सिंह हवारा ग्रुप का चीफ और परमजीत सिंह भ्यौरा ऑपरेशन चीफ था। कोर्ट ने हवारा और भ्यौरा के बारे में कहा कि दोनों ने इस अपराध में ट्रायल के दौरान ही सजा पूरी कर ली है।
ये हुए बरी: मामले में कुल 21 आरोपी थे। बरी होने वालों में जेल के तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट डीएस राणा, डिप्टी जेल सुपरिंटेंडेंट दलबीर सिंह संधू, असिस्टेंट जेल सुपरिंटेंडेंट वेद मित्तल गिल और पीएस राणा, वार्डर इंद्र सिंह, हवलदार निशान सिंह सहित नारायण सिंह चौरा, नंद सिंह, शेर सिंह, लखविंदर सिंह, गुरदीप सिंह, सुबेग सिंह, गुरनाम सिंह और एसपी सिंह शामिल हैं।
कोर्ट ने जगतार सिंह तारा, गुरविंदर सिंह गोल्डी और देवी सिंह को भगोड़ा करार दिया है। 21 आरोपियों में से छह पुलिसकर्मी, दो सीआरपीएफ के कर्मचारी, एक पाकिस्तानी जासूस आबिद मोहम्मद भी शामिल थे। आबिद जासूसी मामले में पहले ही सजा पूरी कर चुका था। इसके बाद उसे वतन वापस भेज दिया गया। कुल 21 आरोपियों में एक महिला बलजीत कौर भी आरोपी थी। हालांकि उसकी ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है।
जेल से 2004 में हुए थे फरार: 21/22 जनवरी 2004 में हवारा, भ्यौरा, तारा और हत्या केस में एक दोषी देवी सिंह करीब 94 फीट लंबी सुरंग खोदकर कर फरार हो गए थे। हवारा और भ्यौरा को फरार होने के 2 वर्ष बाद गिरफ्तार कर लिया गया था। जबकि तारा को इसी साल थाईलैंड से गिरफ्तार किया गया था। देवी सिंह के पाकिस्तान में छिपे होने के संकेत हैं। जेल अधिकारियों सहित कुछ आरोपियों पर जेल ब्रेक में लापरवाही और सहयोग का आरोप था।
1995 में किया था ब्लास्ट: 31 अगस्त, 1995 को पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह की पंजाब सिविल सचिवालय भवन के पास बम ब्लास्ट में हत्या कर दी गई थी। इस ब्लास्ट में 17 अन्य लोगों की भी मौत हुई थी। केएलएफ के दिलवार सिंह जयसिंहवाला ने यह आत्मघाती हमला किया था। मामले में बब्बर खालसा इंटरनेशनल के सदस्य जगतार सिंह हवारा, परमजीत सिंह भ्यौरा, जगतार सिंह तारा को गिरफ्तार किया था।
तीनों बुड़ैल जेल में बंद थे। जेल से फरार होने के बाद देवी सिंह को छोड़ तीनों कैदियों को पुलिस पकड़ चुकी है। वहीं जेल ब्रेक में लापरवाही बरतने वाले जेल कर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ सेक्टर-34 पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया था। बेअंत सिंह हत्याकांड में हवारा और भ्यौरा को उम्रकैद की सजा सुनाई जा सुकी है। जबकि तारा का बेअंत सिंह हत्याकांड में ट्रायल अधूरा रहा और जेल ब्रेक में फिर से ट्रायल शुरू होना है।
दिल्ली पुलिस ने किया था गिरफ्तार: बुड़ैल जेल से फरार होने के बाद आतंकी जगतार सिंह हवारा, परमजीत सिंह भ्यौरा को कुछ महीने बाद दिल्ली पुलिस ने वहां एक सिनेमा हॉल में बम ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार किया था। बम ब्लास्ट मामले की सुनवाई के कारण दोनों आतंकियों को तिहाड़ जेल में शिफ्ट किया गया है। वहीं जगतार सिंह तारा को इस साल पंजाब पुलिस ने थाईलैंड से गिरफ्तार किया था। जबकि देवी सिंह को आज तक पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई है
