बढ़ता संकट : ताइवान पर चीन की क्या है मंशा

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Feb 28th 2022, 15:50, by Bishwa Jha

चीन ने पूर्वी यूरोप में जारी तनाव के बीच धमकी दी है कि ताइवान यूक्रेन नहीं है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ताइवान उनके देश का अविभाज्य हिस्सा है, जिसे कोई अलग नहीं कर सकता। इस बीच ताइवान ने चीन की धमकियों को देखते हुए सैन्य सतर्कता को काफी बढ़ा दिया है। ताइवानी सैन्यबल चौबीसों घंटे चीन से लगी सीमा की सुरक्षा में गश्त लगा रहे हैं। ब्रिटेन समेत कई देशों ने आशंका जताई है कि चीन पूर्वी यूरोप में जारी यूक्रेन संकट का फायदा उठाकर ताइवान के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई कर सकता है। इसके बाद से दक्षिण चीन सागर में भी तनाव गहराने के आसार दिखाई देने लगे हैं।

यूक्रेन युद्ध के बीच ताइवान के आकाश में नौ दफा चीनी विमानों ने घुसपैठ की है। चीन ताइवान पर शुरू से अपना दावा करता रहा है। यही कारण है कि पिछले दो साल से चीन ने इस स्वशासित द्वीप के पास सैन्य गतिविधि तेज कर दी है। हालांकि, ताइवान ने यूक्रेन संकट के बीच चीनी सुरक्षाबलों के किसी असामान्य युद्धाभ्यास की सूचना नहीं दी है। बेजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने यूक्रेन और ताइवान के मुद्दों के बीच किसी भी संबंध को खारिज कर दिया।

चीनी प्रवक्ता का तर्क है कि ताइवान का मुद्दा गृहयुद्ध से बचा हुआ है, लेकिन चीन की अखंडता से कभी समझौता नहीं किया जाना चाहिए था और न ही कभी समझौता किया जाएगा। चीनी गणराज्य की पराजित सरकार 1949 में कम्युनिस्टों से गृहयुद्ध हारने के बाद ताइवान भाग गई, जिन्होंने पीपुल्स रिपब्लिक आफ चाइना की स्थापना की।

ताजा घटनाक्रमों के बीच ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की यूक्रेन संकट पर कार्यकारी समूह की एक बैठक में कहा कि देश की सभी सुरक्षा और सैन्य इकाइयों को ताइवान जलडमरूमध्य के आसपास सैन्य गतिविधियों की निगरानी तेज कर देनी चाहिए। त्साई ने कहा कि कुछ विदेशी ताकतें यूक्रेन संकट के जरिए ताइवान के समाज के मनोबल को प्रभावित करने के इरादे से काम कर रही हैं। दरअसल, चीन और स्वाशासी द्वीपीय क्षेत्र ताइवान के बीच संबंध हमेशा तल्ख रहे हैं।

ताकतवर ड्रेगन के दबाव के बावजूद ताइवान अपनी स्वतंत्रता को लेकर लगातार कोशिशों में लगा रहता है। चीन और ताइवान ये संबंध चीन की आजादी के बाद से ही उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। चीन के ताइवान के साथ संबंध साल 2016 में तब बिगड़ गए थे, जब राष्ट्रपति साई इंग-वेन सत्ता में आई। उनकी पार्टी ने ताइवान को चीन के हिस्से के तौर पर मान्यता देने से मना कर दिया था।

चीन में दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1946 से 1949 तक राष्ट्रवादियों और कम्युनिस्ट पीपुल्स आर्मी के बीच गृह युद्ध हुआ था। 1949 में खत्म हुए इस युद्ध में राष्ट्रवादी हार गए और चीन की मुख्यभूमि से भागकर ताइवान नाम के द्वीप पर चले गए। उन्होंने ताइवान को एक स्वतंत्र देश घोषित किया और उसका आधिकारिक नाम रिपब्लिक आफ चाइना रख दिया गया।

इन तथ्यों को चीन की दावेदारी के संदर्भ में समझना चाहिए, चीन और ताइवान में तनाव के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान को लेकर दो बड़ी बातें कहीं थी। उन्होंने कहा था कि ताइवान के सभी लोगों को साफतौर पर इस बात का अहसास होना चाहिए कि ताइवान की आजादी उसके लिए सिर्फ गंभीर त्रासदी लाएगी। हम शांतिपूर्ण एकीकरण के लिए व्यापक स्थान बनाने को तैयार है, लेकिन हम अलगाववादी गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं छोड़ेंगे।

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