Republic Day 2022: शहीद ASI बाबू राम को अशोक चक्र से किया गया सम्मानित, जानें उनकी वीरता की कहानी

Swati
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Republic Day 2022: शहीद ASI बाबू राम को अशोक चक्र से किया गया सम्मानित, जानें उनकी वीरता की कहानी
Jan 26th 2022, 08:54, by Pankaj Mishra

नई दिल्ली: 

आज पूरा देश 73वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस मौके पर राष्ट्रपति कोविंद ने शहीद ASI बाबू राम को अशोक चक्र से सम्मानित किया। बाबू राम की विधवा रीना रानी और बेटे माणिक ने राष्ट्रपति कोविंद से पुरस्कार प्राप्त किया। जम्मू-कश्मीर पुलिस के सहायक उप निरीक्षक के पद पर तैनात थे। 

ASI बाबू राम ने 29 अगस्त, 2020 को श्रीनगर में एक ऑपरेशन के दौरान तीन आतंकवादियों को मार गिराया था। उन्होंने आतंकवादियों खिलाफ अनुकरणीय साहस दिखाया था और अंततः वीरगति को प्राप्त हुए थे। ASI बाबू राम देश की सेवा के दौरान 14 एनकाउन्टर का हिस्सा रहे जिसमें 28 आतंकवादियों को ढेर किया गया।

29 अगस्त 2020 को श्रीनगर के पंथा चौक पर बाबू राम और उनकी टीम सड़क से गुजरने वाले वाहनों की निगरानी कर रहे थे तभी तीन आतंकियों ने हमला कर दिया। इलाका भीड़भाड़ वाला था तो बाबू राम और उनकी टीम आतंकियों को निशाना नहीं बना पाई।

इसके बाद जब जवानों ने हवा में फायर करना शुरू कर दिया तो आतंकी भागकर पास की एक बिल्डिंग में जा छिपे। जिसमें कुछ आम लोग भी थे। जवानों ने तुरंत इस घर की घेराबंदी कर ली और आतंकियों के साथ मुठभेड़ शुरू हो गई। इस दौरान घर में रहने वाले लोगों को भी बचाना एक बड़ी चुनौती था। उन्होंने अपने साथियों से मोर्चा संभाले रखने को कहा और खुद बिल्डिंग में लोगों को रेस्क्यू करने के लिए पहुंचे। लेकिन वहां आतंकियों ने उन पर गोलियां चलाईं। यहीं बाबू राम का सामना लश्कर के कमांडर शाकिब बशीर से हुआ और एएसआई बाबू राम ने आतंकी को मौत के घाट उतार दिया।

इस ऑपरेशन में तीनों आतंकियों को मार गिराया गया, साथ ही बुरी तरह घायल बाबू राम को अस्पताल पहुंचाया गया। लेकिन इलाज के दौरान एएसआई बाबू राम शहीद हो गए। अब उन्हें उनकी इस बहादुरी और लोगों के लिए अपनी जान दांव पर लगाने के जज्बे के लिए मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया जा रहा है।

बाबू राम पुंछ जिले के सीमावर्ती मेंढर इलाके के एक गांव धारना में 15 मई, साल 1972 को पैदा हुए थे। वह बचपन से ही देश की रक्षा करना चाहते थे। स्कूल की पढ़ाई पूरी होने के बाद वह 1999 में जम्मू कश्मीर पुलिस में कांस्टेबल के तौर पर नियुक्त हुए। अगर वो अपनी जान दांव पर लगाकर ना लड़ते तो आतंकी भयानक साजिशों को अंजाम दे सकते थे।

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