संतोष ग्रुप के संचालक महाराजी एजुकेशनल ट्रस्ट और आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों की तरफ से डेढ़ सौ करोड़ की जमीन अवैध रूप से एक बिल्डर को बेचने का मामला सामने आ रहा है।
सिद्धार्थ विहार स्थित ट्रस्ट की 63 एकड़ जमीन के दस्तावेज हुडको के पास गिरवी होने के बावजूद 21 एकड़ जमीन को एक बिल्डर के हाथों बेच दिया गया।
जांच में पता चला कि ट्रस्ट ने पहले अपनी 21 एकड़ जमीन को परिषद से एक्सचेंज कर दूसरे स्थान पर लिया फिर बिल्डर को बेच दिया। जमीन के कागजात ट्रस्ट के पास न होने के बावजूद परिषद अधिकारियों द्वारा जमीन के विनिमय करने के मामले में जांच कमेटी गठित करने की बात सामने आ रही है।
महाराजी एजुकेशनल ट्रस्ट ने मेडिकल कॉलेज और अस्पताल बनाने के लिए सिद्धार्थ विहार स्थित 63 एकड़ जमीन समेत छह संपत्तियों को गिरवी रखकर हुडको से 75 करोड़ रुपये का लोन लिया था।
लोन नहीं चुकाने पर हुडको ने 63 एकड़ जमीन पर भौतिक कब्जा ले लिया है। इस बीच जांच में सामने आया है कि ट्रस्ट ने 2010 में गिरवी 63 एकड़ जमीन में से 21 एकड़ जमीन का आविप के साथ एक्सचेंज कर लिया। दूसरी जगह मिली जमीन को ट्रस्ट ने 154 करोड़ रुपये में निजी बिल्डर को बेच दिया।
आवास आयुक्त मोहम्मद शाहबुद्दीन ने बताया कि मामले की जांच उप आवास आयुक्त को सौंपी गई है। जांच में गड़बड़ियां सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में संतोष ग्रुप के प्रबंधन का पक्ष जानने की कोशिश की गई लेकिन फोन रिसीव नहीं किया गया।
मेडिकल कॉलेज में बच्चों को दाखिला देकर किया एक्सचेंज
सूत्रों की मानें तो ट्रस्ट के साथ मिलीभगत में शामिल तत्कालीन अधिकारियों ने अपने बच्चों के दाखिले संतोष मेडिकल और डेंटल कॉलेज में करवा दिए।
लाखों की डोनेशन बचाकर अधिकारियों ने करोड़ों की जमीन ट्रस्ट के हवाले कर दी। हुडको द्वारा कब्जा लिए जाने के बाद अब परिषद अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
बिना कागजात देखे कैसे एक्सचेंज हुई जमीन
आवास विकास की योजना में अपनी जमीन देकर उसी आकार की जमीन दूसरे स्थान पर ली जा सकती है। इसके लिए जिस जमीन को एक्सचेंज करना है उसके कागजात दिखाने जरूरी हैं।
मगर परिषद के तत्कालीन इंजीनियरों ने बिना कागजात देखे ही महाराजी ट्रस्ट को दूसरी जगह जमीन दे दी। ऐसे में जो जमीन परिषद के पास है उस पर हुडको का कब्जा है। अधिकारियों की मिलीभगत के चलते आविप को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सिद्धार्थ विहार स्थित ट्रस्ट की 63 एकड़ जमीन के दस्तावेज हुडको के पास गिरवी होने के बावजूद 21 एकड़ जमीन को एक बिल्डर के हाथों बेच दिया गया।
जांच में पता चला कि ट्रस्ट ने पहले अपनी 21 एकड़ जमीन को परिषद से एक्सचेंज कर दूसरे स्थान पर लिया फिर बिल्डर को बेच दिया। जमीन के कागजात ट्रस्ट के पास न होने के बावजूद परिषद अधिकारियों द्वारा जमीन के विनिमय करने के मामले में जांच कमेटी गठित करने की बात सामने आ रही है।
महाराजी एजुकेशनल ट्रस्ट ने मेडिकल कॉलेज और अस्पताल बनाने के लिए सिद्धार्थ विहार स्थित 63 एकड़ जमीन समेत छह संपत्तियों को गिरवी रखकर हुडको से 75 करोड़ रुपये का लोन लिया था।
लोन नहीं चुकाने पर हुडको ने 63 एकड़ जमीन पर भौतिक कब्जा ले लिया है। इस बीच जांच में सामने आया है कि ट्रस्ट ने 2010 में गिरवी 63 एकड़ जमीन में से 21 एकड़ जमीन का आविप के साथ एक्सचेंज कर लिया। दूसरी जगह मिली जमीन को ट्रस्ट ने 154 करोड़ रुपये में निजी बिल्डर को बेच दिया।
आवास आयुक्त मोहम्मद शाहबुद्दीन ने बताया कि मामले की जांच उप आवास आयुक्त को सौंपी गई है। जांच में गड़बड़ियां सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में संतोष ग्रुप के प्रबंधन का पक्ष जानने की कोशिश की गई लेकिन फोन रिसीव नहीं किया गया।
मेडिकल कॉलेज में बच्चों को दाखिला देकर किया एक्सचेंज
सूत्रों की मानें तो ट्रस्ट के साथ मिलीभगत में शामिल तत्कालीन अधिकारियों ने अपने बच्चों के दाखिले संतोष मेडिकल और डेंटल कॉलेज में करवा दिए।
लाखों की डोनेशन बचाकर अधिकारियों ने करोड़ों की जमीन ट्रस्ट के हवाले कर दी। हुडको द्वारा कब्जा लिए जाने के बाद अब परिषद अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
बिना कागजात देखे कैसे एक्सचेंज हुई जमीन
आवास विकास की योजना में अपनी जमीन देकर उसी आकार की जमीन दूसरे स्थान पर ली जा सकती है। इसके लिए जिस जमीन को एक्सचेंज करना है उसके कागजात दिखाने जरूरी हैं।
मगर परिषद के तत्कालीन इंजीनियरों ने बिना कागजात देखे ही महाराजी ट्रस्ट को दूसरी जगह जमीन दे दी। ऐसे में जो जमीन परिषद के पास है उस पर हुडको का कब्जा है। अधिकारियों की मिलीभगत के चलते आविप को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
