एक बार फिर साबित हो गया कि उत्तर भारत में फिल्म का खराब प्रचार और प्रमोशन निर्माताओं और वितरकों को भारी पड़ता है। इम्तियाज अली की हाईवे को पिछले साल सबसे ज्यादा सहारा उत्तर भारत से ही मिला था और इसने दिल्ली-एनसीआर समेत यूपी में अच्छी कमाई की थी।
पुराने रिकॉर्ड के भरोसे इस बार निर्माता-निर्देशक-वितरकों ने सोचा कि यहां फिल्म बिना कोशिशों के चल निकलेगी। परंतु ऐसा नहीं हुआ। पहले सप्ताह में तमाशा ने देश भर में अगर 53 करोड़ रुपये की कमाई की तो उत्तर भारत की तरफ से इसमें मात्र 10 करोड़ रुपये का योगदान रहा।
पुराने रिकॉर्ड के भरोसे इस बार निर्माता-निर्देशक-वितरकों ने सोचा कि यहां फिल्म बिना कोशिशों के चल निकलेगी। परंतु ऐसा नहीं हुआ। पहले सप्ताह में तमाशा ने देश भर में अगर 53 करोड़ रुपये की कमाई की तो उत्तर भारत की तरफ से इसमें मात्र 10 करोड़ रुपये का योगदान रहा।
एक बार फिर साबित हो गया कि उत्तर भारत में फिल्म का खराब प्रचार और प्रमोशन निर्माताओं और वितरकों को भारी पड़ता है। इम्तियाज अली की हाईवे को पिछले साल सबसे ज्यादा सहारा उत्तर भारत से ही मिला था और इसने दिल्ली-एनसीआर समेत यूपी में अच्छी कमाई की थी।
पुराने रिकॉर्ड के भरोसे इस बार निर्माता-निर्देशक-वितरकों ने सोचा कि यहां फिल्म बिना कोशिशों के चल निकलेगी। परंतु ऐसा नहीं हुआ। पहले सप्ताह में तमाशा ने देश भर में अगर 53 करोड़ रुपये की कमाई की तो उत्तर भारत की तरफ से इसमें मात्र 10 करोड़ रुपये का योगदान रहा।
पुराने रिकॉर्ड के भरोसे इस बार निर्माता-निर्देशक-वितरकों ने सोचा कि यहां फिल्म बिना कोशिशों के चल निकलेगी। परंतु ऐसा नहीं हुआ। पहले सप्ताह में तमाशा ने देश भर में अगर 53 करोड़ रुपये की कमाई की तो उत्तर भारत की तरफ से इसमें मात्र 10 करोड़ रुपये का योगदान रहा।
