22.50 करोड़ की रकम देखकर कैश वैन चालक प्रदीप शुक्ला को समझ नहीं आ रहा था कि वह इतने रुपयों का क्या करे। नोटों को छिपाने की परेशानी कहें या फिर बड़ी रकम मिलने की खुशी के चलते वह नोट बांटने लगा था।
उसने दो बक्सों को खोला था। एक बक्से से उसने 50 हजार की गड्डी निकाली थी। कैश वैन से नोटों के बक्सों को गोदाम में रखने के बाद वह सबसे पहले शेविंग करवाने गया।
वहां उसने 500 रुपये दिए। इसके बाद उसने एक जानकार से शराब मंगवाई। 800 रुपये खर्च हुए पर उसने दो हजार रुपये दिए।ढाबे से उसने चिकन, दाल और रोटी ली। इसका बिल 700 रुपये का बना, लेकिन ढाबे वाले को दो हजार रुपये दिए। गोदाम में आने के बाद उसे रकम ठिकाने लगाने की चिंता हुई।
अगले दिन बक्सों को उठाने के लिए वह मजदूरों का प्रबंध करने लगा। मजदूरों को भी पैसे बांटने लगा था। हालांकि शराब का नशा होने के कारण उसे ज्यादा याद नहीं है कि उसने कहां-कहां और कितने पैसे बांटे।
जब पुलिस गोदाम में पहुंची तो वह शराब पी रहा था। पुलिस को देखकर वह गोदाम में रखे पलंग के नीचे जाकर छिप गया।
उसने दो बक्सों को खोला था। एक बक्से से उसने 50 हजार की गड्डी निकाली थी। कैश वैन से नोटों के बक्सों को गोदाम में रखने के बाद वह सबसे पहले शेविंग करवाने गया।
वहां उसने 500 रुपये दिए। इसके बाद उसने एक जानकार से शराब मंगवाई। 800 रुपये खर्च हुए पर उसने दो हजार रुपये दिए।ढाबे से उसने चिकन, दाल और रोटी ली। इसका बिल 700 रुपये का बना, लेकिन ढाबे वाले को दो हजार रुपये दिए। गोदाम में आने के बाद उसे रकम ठिकाने लगाने की चिंता हुई।
अगले दिन बक्सों को उठाने के लिए वह मजदूरों का प्रबंध करने लगा। मजदूरों को भी पैसे बांटने लगा था। हालांकि शराब का नशा होने के कारण उसे ज्यादा याद नहीं है कि उसने कहां-कहां और कितने पैसे बांटे।
जब पुलिस गोदाम में पहुंची तो वह शराब पी रहा था। पुलिस को देखकर वह गोदाम में रखे पलंग के नीचे जाकर छिप गया।
