राजधानी के दो हजार मान्यता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 16 लाख छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। दरअसल पब्लिक स्कूल एसोसिएशन ने अधिनियम 1973 के 10 (1) से मुक्ति की मांग के चलते इन स्कूलों को बंद करने की चेतावनी दे दी है।
एसोसिएशन का कहना है कि यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो वह सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं कर पाएंगे। ऐसे में स्कूलों को बंद करने के अलावा उनके पास कोई और विकल्प नहीं होगा।
दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष आरसी जैन ने बताया कि सरकार अगर पब्लिक स्कूलों को 1973 की धारा 10 (1) से नहीं हटाती है तो स्कूल सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू न कर पाएंगे ऐसे में दिल्ली सरकार व दिल्ली नगर निगम से मान्यता प्राप्त इन दो हजार स्कूलों को बंद करना पड़ेगा।
इससे इनमें पढ़ने वाले लगभग 16 छात्रों को नुकसान होने के साथ लगभग पांच लाख कर्मचारी भी बेरोजगार हो जाएंगे। जैन ने बताया कि छठवें वेतन आयोग को लागू हुए सात वर्ष होने के बावजूद स्कूल अब तक इसे लागू नहीं कर पाए हैं ऐसे में अगर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होतीं हैं तो शिक्षकों का वेतन बढ़ाने के लिए छात्रों की ट्यूशन फीस के साथ अन्य फंड भी बढ़ाने होंगे, ऐसे में असमर्थ अभिभावक इसे वहन नहीं कर पाएंगे।
इस लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करना और शिक्षकों को इसके अनुसार वेतन देना मुमकिन न होगा। जिससे उन्हें मजबूरन इन स्कूलों को बंद करना होगा। जैन ने सरकार से मांग की है कि स्लम, पुनर्वास बस्तियों, गांवों, नियमित व अनियमित बस्तियों के गरीब लोगों को ध्यान में रखते हुए इन स्कूलों को राहत प्रदान की जाए।
