हजारों गवर्नमेंट टीचर्स को सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है। मामला प्रमोशन से जुड़ा है, जो काफी समय से रुका हुआ था। पंजाब में जेबीटी, ईटीटी और सीएण्डवी कैडर के प्रमोशन का रास्ता साफ हो गया है।
शिक्षामंत्री डॉ. दलजीत चीमा ने इस संबंध में गठित चार सदस्यीय कमेटी की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है। लंबे समय से इनका प्रमोशन रुका हुआ था।
टीईटी लागू होने के बाद इन कैडर के टीचरों के प्रमोशन पर रोक लग गई थी, जिसका हल ढूंढने के लिए एक चार मेंबरी कमेटी गठित की गई थी। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि तीन सितंबर 2001 से पहले भर्ती इन तीनों कैडर के सभी टीचर प्रमोशन के योग्य होंगे।
तीन सितंबर-2001 से 23 अगस्त-2010 के बीच भर्ती इन कैडर के ऐसे टीचर जिनकी नियुक्ति नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन के नियमों के मुताबिक हुई है, वे भी प्रमोशन के योग्य होंगे। उस समय टीईटी लागू नहीं था। 23 अगस्त-2010 के बाद भर्ती इन कैडर के टीचरों को प्रमोशन के लिए टीईटी पास करना जरूरी होगा।
प्रवक्ता ने बताया कि टीईटी लागू होने के बाद इन कैडर के प्रमोशन का सारा काम रुक गया था। हालांकि इनमें से कई टीचरों ने तरक्की के लिए जरूरी आठ वर्ष की सेवा टीईटी लागू होने से पहले ही कर ली थी।
टीचरों की मांग पर शिक्षामंत्री ने जून-2015 में डीजीएसई प्रदीप अग्रवाल की अगुवाई में चार मेंबरी कमेटी बनाई थी। इसमें डीपीआई सेकेंडरी बलबीर सिंह ढोल, डीपीआई एलिमेंटरी हरबंस सिंह संधू व ओएसडी लिटिगेशन हरबंस सिंह शामिल थे। कमेटी की सिफारिशों पर ही यह फैसला लिया गया है।
शिक्षामंत्री डॉ. दलजीत चीमा ने इस संबंध में गठित चार सदस्यीय कमेटी की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है। लंबे समय से इनका प्रमोशन रुका हुआ था।
टीईटी लागू होने के बाद इन कैडर के टीचरों के प्रमोशन पर रोक लग गई थी, जिसका हल ढूंढने के लिए एक चार मेंबरी कमेटी गठित की गई थी। सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि तीन सितंबर 2001 से पहले भर्ती इन तीनों कैडर के सभी टीचर प्रमोशन के योग्य होंगे।
तीन सितंबर-2001 से 23 अगस्त-2010 के बीच भर्ती इन कैडर के ऐसे टीचर जिनकी नियुक्ति नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन के नियमों के मुताबिक हुई है, वे भी प्रमोशन के योग्य होंगे। उस समय टीईटी लागू नहीं था। 23 अगस्त-2010 के बाद भर्ती इन कैडर के टीचरों को प्रमोशन के लिए टीईटी पास करना जरूरी होगा।
प्रवक्ता ने बताया कि टीईटी लागू होने के बाद इन कैडर के प्रमोशन का सारा काम रुक गया था। हालांकि इनमें से कई टीचरों ने तरक्की के लिए जरूरी आठ वर्ष की सेवा टीईटी लागू होने से पहले ही कर ली थी।
टीचरों की मांग पर शिक्षामंत्री ने जून-2015 में डीजीएसई प्रदीप अग्रवाल की अगुवाई में चार मेंबरी कमेटी बनाई थी। इसमें डीपीआई सेकेंडरी बलबीर सिंह ढोल, डीपीआई एलिमेंटरी हरबंस सिंह संधू व ओएसडी लिटिगेशन हरबंस सिंह शामिल थे। कमेटी की सिफारिशों पर ही यह फैसला लिया गया है।
