How Karuna Nundy a lawyer In India Is Fighting For Women’s Basic Rights /अमेरिका छोड़ भारत आई इस वकील ने बदल दी रूढ़ीवादी सोच

Swati
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आज के ही दिन यानि 26 नवंबर 1949 को भारत के संविधान निर्माण की प्रक्रिया पूरी हुई थी जिसे 26 जनवरी 1950 को औपचारिक तौर पर देश में लागू किया गया। इस मौके पर मिलिए एक ऐसी शख्‍सियत से जो भारतीय संविधान और इसकी न्यायिक व्यवस्‍‌था से इस कदर प्रभावित हुई कि ब्रिटेन में अपना शानदार कैरियर छोड़ भारत आकर अपनी प्रैक्टिस जारी रखने की हिम्मत दिखाई।

हम बात कर रहे हैं करूणा नंदी की। नंदी ने अर्थशास्‍त्र में डिग्री लेने के बाद टेलिविजन की दुनिया में कदम रखा। लेकिन जल्द ही उन्होंने इसे छोड़ने का फैसला किया और कानून की पढ़ाई करने का फैसला किया।

नंदी ने दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों में से एक कैं‌ब्रिज यूनिवर्सिटी के लॉ कोर्स में एडमिशन लिया और पढ़ाई खत्म करने के साथ ही उन्हें यूनाइटेड नेशन में इंटर्नशिप करने का मौका मिला।

इस शानदार शुरुआत के बाद नंदी के पास विकल्प था कि वो अमेरिका में अपने कैरियर को नई ऊंचाई दे सकती थीं लेकिन, उन्होंने भारत आने का फैसला किया।

असल में दो बातों ने उन्हें भारत आने के लिए प्रेरित किया। पहली भारतीय न्यायपालिका के पास इतनी शक्ति है कि वह किसी भी न्यायालय में दिए गए फैसलों में हस्तक्षेप कर सकती है और फैसलों को बदल सकती है।

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