स्वराज अभियान के तहत जय किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे योगेंद्र यादव को सोमवार देर रात 12 बजे के बाद दिल्ली पुलिस ने विधायक पंकज पुष्कर व अन्य समर्थकों समेत जंतर-मंतर से गिरफ्तार कर लिया।
योगेंद्र उस समय अपने समर्थकों के साथ उस हल को लेकर धरने पर बैठे थे, जिसे वह रेस कोर्स क्लब में किसान स्मारक के रूप में रखना चाहते थे। पुलिस ने परमीशन खत्म होने की बात कहकर जाने को कहा।
वह नहीं उठे तो उन्हें हिरासत में लेकर संसद मार्ग थाने ले गई। योगेंद्र का आरोप है कि पुलिस ने उनकी पिटाई की। मंगलवार को गिरफ्तारी के विरोध में प्रशांत भूषण की याचिका पर हाईकोर्ट ने पुलिस को देरी से पेश करने पर फटकार लगाई।
जय किसान आंदोलन की सभा खत्म करने के बाद योगेंद्र यादव अपने समर्थकों के साथ हल को लेकर धरने पर बैठे थे। उसी समय अचानक पुलिस ने वहां पहुंचकर सभी को उठने के लिए कहा।
योगेंद्र ने विरोध जताया तो पुलिस जबरन हल समेत उनके समर्थकों को हिरासत में लेकर संसद मार्ग थाने ले गई। उन्हें समर्थकों सहित शांति भंग में गिरफ्तार करने के बाद योगेंद्र ने जब थाने की रेलिंग पर पहुंचकर घटना पर मीडिया से बात करने की कोशिश की तो एक इंसपेक्टर उन्हें धकियाते हुए अंदर लेकर चला गया।
गिरफ्तारी के बाद भी कानून के मुताबिक योगेंद्र को उनके वकील प्रशांत भूषण से नहीं मिलने दिया गया। यही नहीं सांसद धर्मवीर गांधी और अली अनवर भी उनसे मिलने पहुंचे लेकिन पुलिस ने उन्हें बिठाए रखा पर मिलवाया नहीं गया।
योगेंद्र की पत्नी तक को पुलिस ने मिलने की इजाजत नहीं दी। कई कोशिश के बाद दोपहर दो बजे उनसे मिलवाया गया। उधर, शाम करीब 4 बजे पुलिस ने योगेंद्र समेत 83 लोगों को रिहा कर दिया।
शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे या धरना दे रहे लोगों को परमीशन की जरूरत नहीं है। यह संविधान की धारा 19 में लिखा है। पुलिस को गिरफ्तारी की बात परिवार को सूचित कर कारण बताना होता है।
मगर योगेंद्र की गिरफ्तारी में ऐसा कुछ नहीं किया था।
योगेंद्र उस समय अपने समर्थकों के साथ उस हल को लेकर धरने पर बैठे थे, जिसे वह रेस कोर्स क्लब में किसान स्मारक के रूप में रखना चाहते थे। पुलिस ने परमीशन खत्म होने की बात कहकर जाने को कहा।
वह नहीं उठे तो उन्हें हिरासत में लेकर संसद मार्ग थाने ले गई। योगेंद्र का आरोप है कि पुलिस ने उनकी पिटाई की। मंगलवार को गिरफ्तारी के विरोध में प्रशांत भूषण की याचिका पर हाईकोर्ट ने पुलिस को देरी से पेश करने पर फटकार लगाई।
पुलिस ने तब कोर्ट को बताया कि योगेंद्र यादव समेत पकड़े गए सभी 83 लोगों को रिहा कर दिया गया। पूरा हाई वोल्टेज ड्रामा रात 12 बजे के बाद का है।
जय किसान आंदोलन की सभा खत्म करने के बाद योगेंद्र यादव अपने समर्थकों के साथ हल को लेकर धरने पर बैठे थे। उसी समय अचानक पुलिस ने वहां पहुंचकर सभी को उठने के लिए कहा।
योगेंद्र ने विरोध जताया तो पुलिस जबरन हल समेत उनके समर्थकों को हिरासत में लेकर संसद मार्ग थाने ले गई। उन्हें समर्थकों सहित शांति भंग में गिरफ्तार करने के बाद योगेंद्र ने जब थाने की रेलिंग पर पहुंचकर घटना पर मीडिया से बात करने की कोशिश की तो एक इंसपेक्टर उन्हें धकियाते हुए अंदर लेकर चला गया।
पार्टी नेताओं ने हिरासत के दौरान योगेंद्र की लिखी एक चिट्ठी का जिक्र करते हुए कहा कि योगेंद्र के साथ मारपीट की गई है। प्रो. आनंद कुमार के मुताबिक हम शांतिपूर्वक धरना दे रहे थे। फिर पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी की।
गिरफ्तारी के बाद भी कानून के मुताबिक योगेंद्र को उनके वकील प्रशांत भूषण से नहीं मिलने दिया गया। यही नहीं सांसद धर्मवीर गांधी और अली अनवर भी उनसे मिलने पहुंचे लेकिन पुलिस ने उन्हें बिठाए रखा पर मिलवाया नहीं गया।
योगेंद्र की पत्नी तक को पुलिस ने मिलने की इजाजत नहीं दी। कई कोशिश के बाद दोपहर दो बजे उनसे मिलवाया गया। उधर, शाम करीब 4 बजे पुलिस ने योगेंद्र समेत 83 लोगों को रिहा कर दिया।
प्रशांत भूषण ने बताया कि वह रात करीब दो बजे से योगेंद्र से मिलने की कोशिश करते रहे लेकिन पुलिसवाले नहीं माने। यह कानून के खिलाफ है।
शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे या धरना दे रहे लोगों को परमीशन की जरूरत नहीं है। यह संविधान की धारा 19 में लिखा है। पुलिस को गिरफ्तारी की बात परिवार को सूचित कर कारण बताना होता है।
मगर योगेंद्र की गिरफ्तारी में ऐसा कुछ नहीं किया था।
