Pakistani attack on screen and incident in cinema hall / पर्दे पर पाकिस्तानी हमला और बालकनी में घुटा दम

Swati
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पाकिस्तान ने हमला कर दिया है... गांव खाली कराओ..। उपहार सिनेमा में बॉर्डर फिल्म के इस सीन के साथ ही गोलाबारी तेज हुई तो बालकनी में धुआं भरना शुरू हो गया। पहले मुझे व मेरे दोस्तों को लगा कि फिल्म में चल रहे सीन का अहसास है लेकिन ज्यों ही दम घुटने लगा और लोग गिरने लगे सारा माजरा समझ में आ गया।

कुछ मिनट पहले ही फिल्म के बीच में टायलेट जाना काम आया और अंधेरे में धुएं को चीरते हुए दरवाजे के बाहर निकल गया। ऊपर से कूदा और अंदर दर्शकों की स्थिति जानते हुए सिनेमा हॉल के एंट्री प्वाइंट पर शीशे की दीवार को तोड़कर धुआं बाहर निकाला।

13 जून वर्ष 1997 का दिन उन सैकड़ों परिवारों को अभी भी डराता है जिन्होंने उपहार सिनेमा अग्निकांड में अपनों को खोया या मौत के मुंह से जैसे तैसे बचे। ऐसे ही एक चश्मदीद हैं महरन नगर पालम निवासी प्रमोद कुमार।

प्रमोद के मुताबिक सिनेमा हॉल प्रबंधन की लापरवाही से राष्ट्रीय खिलाड़ी से मैं टैक्सी का स्टीयरिंग थामने को मजबूर हो गया। अन्य परिवारों की भी ऐसी ही कहानी है।

लापरवाही तो सामने आ ही गई थी, ऐसे में 30-30 करोड़ जुर्माने पर अंसल बंधुओं को छोड़ देना 59 लोगों की मौत का न्याय नहीं कहा जा सकता। ऐसे में कम से कम पूर्व की सजा तो कायम रखनी चाहिए थी।

एयर इंडिया की तरफ� से आयोजित दौड़ में तीन मेडल, रथ मैराथन सहित कई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में नाम कमाने वाले उस समय 24 वर्ष के प्रमोद के मुताबिक वह अपने दोस्त राजेश, अतुल व गायत्री के साथ उस दिन बॉर्डर फिल्म देखने गए थे।

इंटरवल से कुछ मिनट पहले उन्हें टायलेट जाना पड़ा। आकर वापस बैठे तो फिल्म में सनी देओल पाकिस्तान हमले की सूचना देते हुए सुनील शेट्टी को गांव खाली कराने भेजते हैं।

इस दौरान गोलीबाजी की आवाज व आग के सीन पर्दे पर दिखने लगते हैं। कुछ ऐसा ही उसी समय सिनेमा हॉल के अंदर हुआ। लाइट जाने पर जनरेटर चलने लगा और ट्रांसफार्मर में आग लग गई।

फिल्म देखते-देखते बालकनी में धुआं भरने लगा तो एक बार लगा कि पर्दे पर चल रहे सीन का असर है लेकिन जब सांस लेने में दिक्कत हुई तो इसी दौरान आग-आग का शोर मचा।

टायलेट से अंधेरे में आना काम आया तो धुआं भरने के बावजूद अंदाजे से मैं बाहर भागा। शीशे के दरवाजे को तोड़ा तो कोहनी में चोट लग गई। इसके बाद खिड़की से देखा तो नीचे गद्दे वाली दुकान चलाने वाले ने अपने गद्दे लोगों की जान बचाने के लिए बिछा दिए थे। एथलीट होने का फायदा उठाते हुए मैंने फुर्ती दिखाई और गद्दों पर कूद गया।

नीचे कूदने के बाद समय न गंवाते हुए एंट्री पर लगे शीशे की दीवार को कुर्सी मारकर स्वयं तोड़ा और धुएं का गुबार बाहर निकला। पब्लिक व फायर ब्रिगेड की मदद से करीब 150 लोगों को बाहर निकाला गया इनमें अधिकांश बेहोशी की हालत में थे।

क्या बताऊं साहब इसके बाद स्वास्थ्य के साथ न देने व कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने पर मेरा करियर ही बर्बाद हो गया। एथलीट कोटे से एयर इंडिया में भर्ती होने वाला था लेकिन इस कांड के बाद सारे सपने बिखर गए। अब एयरपोर्ट पर टैक्सी चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करता हूं।

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