दिल्ली सरकार की सियासत पर अगर फिल्मों का असर दिखता है तो उसकी वजह है केजरीवाल और उनकी टीम का फिल्मों के प्रति प्यार और इन्हें देखने की ट्रिक। दिल्ली सरकार एसेंबली से ऑडिटोरियम तक थिएटर की हर अवस्था को पसंद करती है। अगर आपको नहीं पता है कि नई फिल्म आपके पैसे की कीमत अदा करेगी या नहीं..तो आप थोड़ा इंतजार करें।
आपको एक नए फिल्मी विश्लेषक से फिल्म का रिव्यू जल्द ही मिल जाएगा। जी हां.. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से आपको फिल्म की जानकारी मिल जाएगी। उनका रिव्यू बहुत छोटा होता है, ये महज चंद शब्दों का ही होता है।
इसलिए आपको जटिल सिनेमा शास्त्र या साहित्य पढ़ने में भी समय बर्बाद नहीं करना पड़ेगा। अंतत: आपको पता चल ही जाएगा कि नई फिल्म देखने लायक है या नहीं और साथ ही ये भी पता चल जाएगा कि मफलर मैन ने इसे अपनी टीम और परिवार के साथ एन्जॉय किया या नही।
आमतौर पर केजरीवाल की तुलना नायक फिल्म के अनिल कपूर से की जाती है। अरविंद केजरीवाल अबतक भ्रष्टाचार, प्रशासन और पुलिस जैसे विषयों पर बनी फिल्में देख चुके हैं। इसलिए अगर आपने गब्बर इज बैक, मसान या दृश्यम नहीं देखी तो हो संभव है कि आप व्यस्त रहे होंगे लेकिन आपके सीएम केजरीवाल इतने व्यस्त नहीं थे।
वास्तव में ये ट्विटर पर भी नोटिस किया जा चुका है। इनमें से कुछ की स्क्रीनिंग के बाद हैश टैग केजरीमूवीज (#KejriMovies ) के साथ काफी बातें हो चुकी है। आप सोच रहे होंगे कि केजरीवाल के लिए फिल्म कौन तय करता है कि ये देखनी चाहिए या नहीं। बेशक.. ये भी दिल्ली के सीएम केजरीवाल ही तय करते हैं।
जब उन लोगों से बात की गई जो सीएम के लिए स्क्रीनिंग का आयोजन करते हैं, तो उन्होंने बताया कि "केजरीवाल जी ने कहा- हमने इस फिल्म के बारे में बहुत सुना है। हमें देखनी थी.. पर टिकट मिल नहीं रहा है।
फिर उनके किसी दोस्त ने प्रोड्यूसर को फोन किया, जिन्होंने हमें यहां फिल्म स्क्रीनिंग कराने के लिए कहा। जब बात सीएम के लिए स्क्रीनिंग के आयोजन की होती है तो हमारे पास ज्यादा विकल्प नहीं होते। फिर एक 15-20 लोगों का ग्रुप, जिसमें आशुतोष, कुमार विश्वास, मनीष सिसोदिया- आप की कोर टीम और उनके फैमिली मेंबर फिल्म देखने के लिए आते हैं।"
आपको एक नए फिल्मी विश्लेषक से फिल्म का रिव्यू जल्द ही मिल जाएगा। जी हां.. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से आपको फिल्म की जानकारी मिल जाएगी। उनका रिव्यू बहुत छोटा होता है, ये महज चंद शब्दों का ही होता है।
इसलिए आपको जटिल सिनेमा शास्त्र या साहित्य पढ़ने में भी समय बर्बाद नहीं करना पड़ेगा। अंतत: आपको पता चल ही जाएगा कि नई फिल्म देखने लायक है या नहीं और साथ ही ये भी पता चल जाएगा कि मफलर मैन ने इसे अपनी टीम और परिवार के साथ एन्जॉय किया या नही।
आमतौर पर केजरीवाल की तुलना नायक फिल्म के अनिल कपूर से की जाती है। अरविंद केजरीवाल अबतक भ्रष्टाचार, प्रशासन और पुलिस जैसे विषयों पर बनी फिल्में देख चुके हैं। इसलिए अगर आपने गब्बर इज बैक, मसान या दृश्यम नहीं देखी तो हो संभव है कि आप व्यस्त रहे होंगे लेकिन आपके सीएम केजरीवाल इतने व्यस्त नहीं थे।
वास्तव में ये ट्विटर पर भी नोटिस किया जा चुका है। इनमें से कुछ की स्क्रीनिंग के बाद हैश टैग केजरीमूवीज (#KejriMovies ) के साथ काफी बातें हो चुकी है। आप सोच रहे होंगे कि केजरीवाल के लिए फिल्म कौन तय करता है कि ये देखनी चाहिए या नहीं। बेशक.. ये भी दिल्ली के सीएम केजरीवाल ही तय करते हैं।
जब उन लोगों से बात की गई जो सीएम के लिए स्क्रीनिंग का आयोजन करते हैं, तो उन्होंने बताया कि "केजरीवाल जी ने कहा- हमने इस फिल्म के बारे में बहुत सुना है। हमें देखनी थी.. पर टिकट मिल नहीं रहा है।
फिर उनके किसी दोस्त ने प्रोड्यूसर को फोन किया, जिन्होंने हमें यहां फिल्म स्क्रीनिंग कराने के लिए कहा। जब बात सीएम के लिए स्क्रीनिंग के आयोजन की होती है तो हमारे पास ज्यादा विकल्प नहीं होते। फिर एक 15-20 लोगों का ग्रुप, जिसमें आशुतोष, कुमार विश्वास, मनीष सिसोदिया- आप की कोर टीम और उनके फैमिली मेंबर फिल्म देखने के लिए आते हैं।"
