जामिया मिल्लिया इस्लामिया में अब रात 8 बजे के बाद लड़कियों का हॉस्टल में प्रवेश नहीं होगा। जामिया प्रबंधन ने हॉस्टल नियमों में बदलाव किया है। सत्र शुरू होने के साथ ही विश्वविद्यालय में नए नियम का विरोध भी तेज हो गया है।
छात्राओं का कहना है कि नियम लड़कों पर भी बराबर लागू होने चाहिए। प्रबंधन का तर्क है कि सुरक्षा के लिहाज से नियम में बदलाव किया गया है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही कैंपस में 1300 छात्राओं का विरोध तेज हो गया है।
नई छात्राओं को तो पुराने हॉस्टल नियमों की जानकारी नहीं थी, लेकिन जैसे ही पुरानी छात्राएं कैंपस पहुंचीं, उन्होंने विरोध करना शुरू कर दिया है। इनका कहना है कि नियम में बदलाव का स्वागत है, लेकिन यह लड़कों के हॉस्टल पर भी लागू होना चाहिए। क्योंकि सुरक्षा के मानक लड़के और लड़कियां दोनों पर बराबर लागू होते हैं।
हॉस्टल में जारी नोटिस में लिखा गया है कि अब छात्राओं को रात आठ बजे के बाद हॉस्टल में एंट्री नहीं मिलेगी। यदि कोई छात्रा समय से हॉस्टल नहीं पहुंचती है तो उसकी जानकारी पेरेंट्स को दी जाएगी।
सके अलावा छात्रा जिस लोकल गार्जियन के पास गेट पास लेकर गई होगी, उनके हस्ताक्षर सहित लिखित जानकारी भी विश्वविद्यालय को देनी होगी। छात्राएं इस बात का विरोध कर रही हैं कि पहले उन्हें रात 10 बजे तक हॉस्टल में आने की इजाजत थी।
नोटिस में सुरक्षा कारण और मेस का खाना बर्बाद होने का हवाला दिया गया है, क्योंकि जो छात्राएं देरी से आती हैं, वे अक्सर बाहर खाना खाकर आती हैं। छात्राओं का कहना है कि कैंपस में अक्सर उनके अधिकारों को कम किया जा रहा है।
इससे पहले रेप के विरोध में सेनेटरी अभियान को भी रोक दिया गया था, जबकि लड़कों को विश्वविद्यालय हर तरह की आजादी दे रहा है। उधर, प्रबंधन का कहना है कि यदि कोई छात्रा दिल्ली के बाहर से आ रही होगी या फिर किसी की 8 बजे के बाद ट्रेन, बस होगी, तो उस परिस्थिति में छूट मिलेगी।
