इस साल के रैमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता और दिल्ली में अपना एनजीओ चलाने वाले अंशू गुप्ता का कहना है कि भिखारी केवल शहरों में ही दिखते हैं गांव में बहुत कम पाए जाते हैं।
इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि अगर शहर में भीख मांगने वालों से पूछें तो आप पाएंगे कि अपने गांव में वह अच्छा-खासा सम्मानित व्यक्ति है, लेकिन गांव की बदहाल हालत ने उसे शहर में भीख मांगने के लिए मजबूर कर दिया है।
जबकि शहरों में भीख मांगने का काम इतना सामान्य हो चुका है कि यहां रहने वाले लोग इसे रोजाना की जिंदगी का हिस्सा मानते हैं। बल्कि शहरों में तो यह इतनी सामान्य बात हो चुकी है कि अब यह एक संगठित पेशे की शक्ल अख्तियार कर चुका है।
इस पेशे की सच्चाई और इससे जुड़ी कमाई पर बना एक वीडियो फिलहाल इंटरनेट पर वायरल हो चुका है। 31 जुलाई को यू-ट्यूब पर पोस्ट किया गया यह वीडियो अब तक डेढ़ लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है।
असल में इस वीडियो में दिखाया गया है कि डीयू से ग्रेजुएट एक छात्र बीपीओ में नौकरी करके महीने में पंद्रह हजार रुपये कमाता है, जबकि सड़क पर भीख मांगने का काम करने वाला शख्स उससे कहीं ज्यादा की कमाई करता है।
इंडी वायरल की टीम एक युवा को भिखारी के गेटअप में स्पाई कैमरे के साथ सड़क पर भीख मांगने के लिए भेजती है। दो घंटे भीख मांगने के बाद वह युवा दो सौ रुपये कमाने का दावा करता है।
वीडियो में बताया गया है कि इस तरह से एक दिन में ही एक भीखारी दस घंटे के अपने काम से एक हजार रुपया प्रतिदिन यानि महीने के तीस हजार रुपये कमाता है, जबकि बीपीओ में काम करने वाला डीयू का ग्रेजुएट महीने के पंद्रह हजार।
इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि अगर शहर में भीख मांगने वालों से पूछें तो आप पाएंगे कि अपने गांव में वह अच्छा-खासा सम्मानित व्यक्ति है, लेकिन गांव की बदहाल हालत ने उसे शहर में भीख मांगने के लिए मजबूर कर दिया है।
जबकि शहरों में भीख मांगने का काम इतना सामान्य हो चुका है कि यहां रहने वाले लोग इसे रोजाना की जिंदगी का हिस्सा मानते हैं। बल्कि शहरों में तो यह इतनी सामान्य बात हो चुकी है कि अब यह एक संगठित पेशे की शक्ल अख्तियार कर चुका है।
इस पेशे की सच्चाई और इससे जुड़ी कमाई पर बना एक वीडियो फिलहाल इंटरनेट पर वायरल हो चुका है। 31 जुलाई को यू-ट्यूब पर पोस्ट किया गया यह वीडियो अब तक डेढ़ लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है।
असल में इस वीडियो में दिखाया गया है कि डीयू से ग्रेजुएट एक छात्र बीपीओ में नौकरी करके महीने में पंद्रह हजार रुपये कमाता है, जबकि सड़क पर भीख मांगने का काम करने वाला शख्स उससे कहीं ज्यादा की कमाई करता है।
इंडी वायरल की टीम एक युवा को भिखारी के गेटअप में स्पाई कैमरे के साथ सड़क पर भीख मांगने के लिए भेजती है। दो घंटे भीख मांगने के बाद वह युवा दो सौ रुपये कमाने का दावा करता है।
वीडियो में बताया गया है कि इस तरह से एक दिन में ही एक भीखारी दस घंटे के अपने काम से एक हजार रुपया प्रतिदिन यानि महीने के तीस हजार रुपये कमाता है, जबकि बीपीओ में काम करने वाला डीयू का ग्रेजुएट महीने के पंद्रह हजार।
