अक्सर चर्चा ने रहने वाले दिल्ली महिला आयोग के निशाने पर इस बार जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर हैं। आयोग ने कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे एक हफ्ते में जवाब मांगा है।
जामिया ने हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों के लिए हाल ही में एक निर्देश जारी किया है जिसमें कहा गया है कि अगर कोई भी छात्रा रात आठ बजे के बाद हॉस्टल से बाहर रहती है तो उसे प्रवेश की अनुमति नहीं मिलेगी।
आयोग द्वारा जामिया के वाइस चांसल तलत अहमद को भेजे नोटिस में पूछा गया है कि इस तरह की कोई भी गाइडलाइन किसी भी अन्य यूनिवर्सिटी के द्वारा जारी नहीं की गई है।
ऐसा लगता है कि जामिया में भी जो गाइडलाइन जारी की गई है वह सिर्फ लड़कियों के लिए है जबकि हॉस्टल में रहने वाले लड़कों के लिए ऐसी कोई गाइडलाइन नहीं है। यही कारण है कि संस्थान पर भेदभाव का आरोप लग रहा है।
नोटिस में वीसी से लड़कियों पर ऐसे प्रतिबंध लगाने का कारण पूछा गया है। साथ ही उनसे इन प्रावधानों की कॉपी और संशोधित दिशानिर्देशों सहित एक हफ्ते में जवाब मांगा गया है।
बता दें कि हाल ही जामिया ने लड़कियों के लिए रात में हास्टल से बाहर रहने के संबंध में कुछ गाइडलाइन जारी किए थे। छात्राओं ने इस गाइडलाइन को लिंगभेदी कह कर इसका विरोध किया था।
आठ बजे रात वाली गाइडलाइन के जारी होने से पहले लड़कियों को महीने में दो बार रात दस बजे तक हास्टल के बाहर रहने की अनुमति थी। इस नई गाइडलाइन के बाद लड़कियों के आठ बजे के बाद हॉस्टल में प्रवेश नहीं मिलेगा।
हालांकि महिला आयोग की नोटिस में कहा गया है कि यह गाइडलाइन छात्राओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए जारी की गई लगती है लेकिन आठ बजे के बाद हॉस्टल में न घुसने देने की शर्त उन्हें बड़ी मुसीबत में डाल सकती है।
इस बारे में जामिया के प्रसक्ता का कहना है कि वह इस मामले को गंभीरता से देख रहे हैं और हम आयोग को नियत समय सीमा के भीतर जवाब देंगे।
जामिया ने हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों के लिए हाल ही में एक निर्देश जारी किया है जिसमें कहा गया है कि अगर कोई भी छात्रा रात आठ बजे के बाद हॉस्टल से बाहर रहती है तो उसे प्रवेश की अनुमति नहीं मिलेगी।
आयोग द्वारा जामिया के वाइस चांसल तलत अहमद को भेजे नोटिस में पूछा गया है कि इस तरह की कोई भी गाइडलाइन किसी भी अन्य यूनिवर्सिटी के द्वारा जारी नहीं की गई है।
ऐसा लगता है कि जामिया में भी जो गाइडलाइन जारी की गई है वह सिर्फ लड़कियों के लिए है जबकि हॉस्टल में रहने वाले लड़कों के लिए ऐसी कोई गाइडलाइन नहीं है। यही कारण है कि संस्थान पर भेदभाव का आरोप लग रहा है।
नोटिस में वीसी से लड़कियों पर ऐसे प्रतिबंध लगाने का कारण पूछा गया है। साथ ही उनसे इन प्रावधानों की कॉपी और संशोधित दिशानिर्देशों सहित एक हफ्ते में जवाब मांगा गया है।
बता दें कि हाल ही जामिया ने लड़कियों के लिए रात में हास्टल से बाहर रहने के संबंध में कुछ गाइडलाइन जारी किए थे। छात्राओं ने इस गाइडलाइन को लिंगभेदी कह कर इसका विरोध किया था।
आठ बजे रात वाली गाइडलाइन के जारी होने से पहले लड़कियों को महीने में दो बार रात दस बजे तक हास्टल के बाहर रहने की अनुमति थी। इस नई गाइडलाइन के बाद लड़कियों के आठ बजे के बाद हॉस्टल में प्रवेश नहीं मिलेगा।
हालांकि महिला आयोग की नोटिस में कहा गया है कि यह गाइडलाइन छात्राओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए जारी की गई लगती है लेकिन आठ बजे के बाद हॉस्टल में न घुसने देने की शर्त उन्हें बड़ी मुसीबत में डाल सकती है।
इस बारे में जामिया के प्रसक्ता का कहना है कि वह इस मामले को गंभीरता से देख रहे हैं और हम आयोग को नियत समय सीमा के भीतर जवाब देंगे।
