Brain dead man gives life to three / जाते-जाते वो दे गया तीन लोगों को नई जिंदगी

Swati
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ब्रेन डेड होने के बाद अंग दान करने वाले लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। ऐसा ही एक ब्रेन डेड मरीज तीन लोगों को नई जिंदगी दे गया। जबकि, तीन अन्य भी जल्द नए जीवन में सुरक्षित प्रवेश कर जाएंगे।

बता दें कि 2 अगस्त के दोपहर मूलचंद से एम्स ट्रांसप्लांट कोऑडिनेटर राजीव मैखुरी को पीड़ित परिवार ने अंगदान के लिए संपर्क किया। इसके बाद मरीज को मूलचंद से एम्स ट्रामा सेंटर शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉ एमसी मिश्रा ने बताया कि 64 वर्षीय ब्रेन डेड रमेश सब्बरवाल के शरीर से हार्ट, हार्ट वॉल्व, दोनों किडनी, लिवर और दोनों कॉर्निया निकाला गया।

डॉक्टरों के अनुसार योग्य नहीं होने के कारण हार्ट ट्रांसप्लांट नहीं हो सका। वहीं, एम्स में ही दोनों किडनी और लिवर तीन वयस्क लोगों को प्रत्यारोपित किया गया।

मूलचंद अस्पताल में ब्रेन डेड होने के बाद भी अंग दान के लिए एम्स ट्रामा सेंटर रेफर करने में करीब 12 घंटे की देरी हुई। इसके पीछे मरीज का इंश्योरेंस का पैसा अस्पताल पहुंचने में देरी बताई जा रही है।

हालांकि, अस्पताल प्रशासन ऐसी किसी बात से इनकार कर रहा है। नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ऑर्ग्रेनाइजेशन के निदेशक डॉ.स्वदान सिंह ने बताया कि शुरुआत में ऐसी दिक्कत आई थी।

बाद में अस्पताल प्रशासन से इस संबंध में बातचीत की गई तो ब्रेन डेड मरीज को अंग दान के लिए एम्स रेफर कर दिया गया। दरअसल, सोमवार दोपहर 12 बजे परिजनों ने एम्स में संपर्क किया था, लेकिन मरीज को रात 12.15 बजे एम्स शिफ्ट किया जा सका।

जबकि, हार्ट वॉल्व और दोनों कॉर्निया को एम्स के कॉर्निया बैंक में सुरक्षित रख लिया गया है। एम्स निदेशक ने बताया कि पूरी प्रक्रिया के लिए तीन ओटी में एक साथ सर्जरी शुरू की गई।

सुबह 9.30 से अंग निकालने का काम शुरू हुआ, जो दोपहर 2.30 बजे खत्म हुआ। इसके बाद अंग प्रत्यारोपण शुरू किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में 100 डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और टेक्नीशियन्स की टीम जुटी रही।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि एक अगस्त की सुबह मुखर्जी नगर के रमेश सब्बरवाल को भर्ती कराया गया। शाम में वहां के डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया।

इसके बाद दो अगस्त को दोपहर 12 बजे एम्स को सूचना मिली। उसी रात करीब 12.15 बजे मरीज को एम्स ट्रामा सेंटर लाया गया।

रात एक बजे से ब्रेन डेड घोषित करने की प्रक्रिया शुरू हुई, जो सुबह सात बजे तक चली। ब्रेन डेड मरीज अविवाहित था, लिहाजा बहन और भतीजा ने उनकी इच्छानुसार अंग दान करने का निर्णय लिया।

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