बिहार में जैसे-जैसे चुनावी सरगर्मी तेज हो रही है, वैसे ही इसकी आंच राष्ट्रीय राजनीति तक भी पहुंच रही है। दिल्ली में संसद के हंगामे और बिहार घमासान की चर्चाओं के बीच शरद पवार के घर एंटी बीजेपी और एंटी कांग्रेस दलों की बैठक हुई।
इस बैठक का निमंत्रण आम आदमी पार्टी को भी मिला था। लेकिन पार्टी मुखिया केजरीवाल ने अपने सहयोगी नेताओं से विमर्श के बाद इस बैठक से दूर रहना ही उचित समझा।
दरअसल शरद पवार के घर चाय पर चर्चा में केजरीवाल के शामिल न होने का कारण कुछ सियासी समीकरण थे। लोकसभा चुनाव के बाद केजरीवाल राष्ट्रीय राजनीति में एक-एक कदम फूंक कर रखना चाहते हैं।
एंटी बीजेपी और एंटी कांग्रेस दलों के निमंत्रण के बाद भी अरविंद केजरीवाल चाय पर चर्चा करने शरद पवार घर इसलिए नहीं पहुंचे। क्योंकि उनकी सोच जरा अलग थी।
वास्तव में राष्ट्रीय स्तर पर अरविंद केजरीवाल की भूमिका धीरे-धीरे निखरती जा रही है। इसे लेकर केजरीवाल बेहद संजीदा तरीके से काम भी कर रहे हैं।
1- दिल्ली चुनाव जीतने के बाद से ही केजरीवाल दो ऐजेंडे पर एक साथ काम कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक आम आदमी पार्टी को दो भागों में बांट दिया गया है। एक भाग वो है-जो दिल्ली में 70 सूत्री एजेंडा कैसे पूरा किया जाए, इस पर काम कर रहा है। इसकी अगुवाई दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया कर रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर अरविंद केजरीवाल केंद्र से लड़ाई के साथ भविष्य में अपनी राष्ट्रीय राजनीति एंट्री करने के रोडमैप पर काम कर रहे हैं। शायद यही वजह थी कि पवार के घर बैठक में शामिल होने से पहले अरविंद केजरीवाल ने आखिरी वक्त तक सोच-विचार किया।
2- सूत्रों की मानें तो अरविंद केजरीवाल को इस बैठक के लिए निमंत्रण पहले से तय नहीं था या यूं कहें की ये बैठक पूर्व निर्धारित नहीं थी। बिहार के महागठंबधन में सीटों के बंटवारे के अनुसार जेडीयू-100, आरजेडी-100, कांग्रेस-40 और एनसीपी के महज 03 सीटों दी गई।
ऐसे में एनसीपी को मिली 3 सीटों की गणित से नाराज शरद पवार ने अकेले पूरे बिहार में चुनाव लड़ने का फैसला किया। लेकिन पवार के फैसले को वापस लेने के लिए सभी एंटी बीजेपी दलों ने शरद पवार को मनाने की कोशिश की।
जिसकी चलते पवार ने सभी दलों को अपने घर चाय पर आमंत्रित किया।
हालांकि केजरीवाल ने फोन पर शरद पवार के निमंत्रण पर घर आने की बात कही थी। जिसके बाद ये बात मीडिया में फैली कि अरविंद केजरीवाल थर्ड फ्रंट के नेताओं से शरद पवार के घर मुलाकात करेंगे और केजरीवाल को बड़ी भूमिका दिये जाने की उम्मीद है।
इन खबरों का खंडन आम आदमी पार्टी ने इसलिए नहीं किया क्योकि अरविंद केजरीवाल की ओर से पार्टी में जाने की बात तो कही नहीं गई। ऐसे में� कहीं खंडन करना कही भारी न पड़ जाए।
इस बैठक का निमंत्रण आम आदमी पार्टी को भी मिला था। लेकिन पार्टी मुखिया केजरीवाल ने अपने सहयोगी नेताओं से विमर्श के बाद इस बैठक से दूर रहना ही उचित समझा।
दरअसल शरद पवार के घर चाय पर चर्चा में केजरीवाल के शामिल न होने का कारण कुछ सियासी समीकरण थे। लोकसभा चुनाव के बाद केजरीवाल राष्ट्रीय राजनीति में एक-एक कदम फूंक कर रखना चाहते हैं।
एंटी बीजेपी और एंटी कांग्रेस दलों के निमंत्रण के बाद भी अरविंद केजरीवाल चाय पर चर्चा करने शरद पवार घर इसलिए नहीं पहुंचे। क्योंकि उनकी सोच जरा अलग थी।
वास्तव में राष्ट्रीय स्तर पर अरविंद केजरीवाल की भूमिका धीरे-धीरे निखरती जा रही है। इसे लेकर केजरीवाल बेहद संजीदा तरीके से काम भी कर रहे हैं।
1- दिल्ली चुनाव जीतने के बाद से ही केजरीवाल दो ऐजेंडे पर एक साथ काम कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक आम आदमी पार्टी को दो भागों में बांट दिया गया है। एक भाग वो है-जो दिल्ली में 70 सूत्री एजेंडा कैसे पूरा किया जाए, इस पर काम कर रहा है। इसकी अगुवाई दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया कर रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर अरविंद केजरीवाल केंद्र से लड़ाई के साथ भविष्य में अपनी राष्ट्रीय राजनीति एंट्री करने के रोडमैप पर काम कर रहे हैं। शायद यही वजह थी कि पवार के घर बैठक में शामिल होने से पहले अरविंद केजरीवाल ने आखिरी वक्त तक सोच-विचार किया।
2- सूत्रों की मानें तो अरविंद केजरीवाल को इस बैठक के लिए निमंत्रण पहले से तय नहीं था या यूं कहें की ये बैठक पूर्व निर्धारित नहीं थी। बिहार के महागठंबधन में सीटों के बंटवारे के अनुसार जेडीयू-100, आरजेडी-100, कांग्रेस-40 और एनसीपी के महज 03 सीटों दी गई।
ऐसे में एनसीपी को मिली 3 सीटों की गणित से नाराज शरद पवार ने अकेले पूरे बिहार में चुनाव लड़ने का फैसला किया। लेकिन पवार के फैसले को वापस लेने के लिए सभी एंटी बीजेपी दलों ने शरद पवार को मनाने की कोशिश की।
जिसकी चलते पवार ने सभी दलों को अपने घर चाय पर आमंत्रित किया।
3- वहीं इसी दौरान ममता बनर्जी अरविंद केजरीवाल से केंद्र के खिलाफ लड़ने को लेकर चर्चा करने गई थी। शरद यादव के निमंत्रण पर ममता बनर्जी केजरीवाल को भी साथ चलने की बात कही। इतना ही नहीं ममता बनर्जी ने शरद पवार से फोन पर बात भी केजरीवाल की बात करवाई।
हालांकि केजरीवाल ने फोन पर शरद पवार के निमंत्रण पर घर आने की बात कही थी। जिसके बाद ये बात मीडिया में फैली कि अरविंद केजरीवाल थर्ड फ्रंट के नेताओं से शरद पवार के घर मुलाकात करेंगे और केजरीवाल को बड़ी भूमिका दिये जाने की उम्मीद है।
इन खबरों का खंडन आम आदमी पार्टी ने इसलिए नहीं किया क्योकि अरविंद केजरीवाल की ओर से पार्टी में जाने की बात तो कही नहीं गई। ऐसे में� कहीं खंडन करना कही भारी न पड़ जाए।
