कश्मीर के हालात पर केंद्रित ‘कश्मीर द वाजपेयी ईयर’ पुस्तक का विमोचन पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने यूटी गेस्ट हाउस में किया। विमोचन के दौरान पुस्तक के लेखक व रॉ चीफ एएस दुलत भी मौजूद थे। कार्यक्रम का आयोजन चंडीगढ़ लिटरेरी सोसायटी ने किया।
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि ‘कश्मीर द वाजपेयी ईयर’ पुस्तक 1989 में कश्मीर के आतंक पर केंद्रित है। पुस्तक का विमोचन चंडीगढ़ से पहले देश के कई राज्यों में हो चुका है। रॉ चीफ एएस दुलत ने कहा कि कश्मीर में 1989 के हालात को सुधारने की पहल वाजयेपी सरकार ने की थी।
तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कश्मीर का दौरा कर वहां के हालात का जायजा भी लिया था। इसके बाद कश्मीर में सद्भावना व शांति स्थापित करने की शुरूआत की गई। इसी पर केंद्रित है यह पुस्तक।
चंडीगढ़ से मेरा पुराना नाता है
रॉ चीफ एएस दुलत ने कहा कि चंडीगढ़ से उनका पुराना नाता है। उनका जन्म दिसंबर 1940 में पंजाब के सियालकोट में हुआ था। पिता शमशेर दुलत जज थे और वह दिल्ली में कार्यरत थे। उनकी शिक्षा चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी में हुई।
उन्होंने 1965 में बतौर आईपीएस ज्वाइन किया। इसके बाद उन्होंने 1969 में आईबी ज्वाइन की। आईबी में उन्होंने करीब 30 साल सेवा की। इसके बाद वाजपेयी सरकार में उन्होंने बतौर पीएमओ ज्वाइन किया। वाजपेयी सरकार ने उन्हें कश्मीर की जिम्मेदारी सौंपी।
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि ‘कश्मीर द वाजपेयी ईयर’ पुस्तक 1989 में कश्मीर के आतंक पर केंद्रित है। पुस्तक का विमोचन चंडीगढ़ से पहले देश के कई राज्यों में हो चुका है। रॉ चीफ एएस दुलत ने कहा कि कश्मीर में 1989 के हालात को सुधारने की पहल वाजयेपी सरकार ने की थी।
तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कश्मीर का दौरा कर वहां के हालात का जायजा भी लिया था। इसके बाद कश्मीर में सद्भावना व शांति स्थापित करने की शुरूआत की गई। इसी पर केंद्रित है यह पुस्तक।
चंडीगढ़ से मेरा पुराना नाता है
रॉ चीफ एएस दुलत ने कहा कि चंडीगढ़ से उनका पुराना नाता है। उनका जन्म दिसंबर 1940 में पंजाब के सियालकोट में हुआ था। पिता शमशेर दुलत जज थे और वह दिल्ली में कार्यरत थे। उनकी शिक्षा चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी में हुई।
उन्होंने 1965 में बतौर आईपीएस ज्वाइन किया। इसके बाद उन्होंने 1969 में आईबी ज्वाइन की। आईबी में उन्होंने करीब 30 साल सेवा की। इसके बाद वाजपेयी सरकार में उन्होंने बतौर पीएमओ ज्वाइन किया। वाजपेयी सरकार ने उन्हें कश्मीर की जिम्मेदारी सौंपी।
