अब इक्डोल छात्रों पर फीस बढ़ोतरी का भार पड़ गया है। प्रदेश विश्वविद्यालय ने दूरवर्ती शिक्षा एवं मुक्त अध्ययन केंद्र (आईसीडीईओएल) ने पीजी और यूजी छात्रों की लाइब्रेरी सिक्योरिटी में कई गुना बढ़ोतरी कर दी है।
अब पुस्तकालय की सुविधा का इस्तेमाल करने वाले छात्रों को हजारों में सिक्योरिटी जमा करवानी पड़ेगी। इक्डोल से यूजी कोर्स करने वाले छात्रों से पहले 200 रुपये लाइब्रेरी सिक्योरिटी ली जाती थी। इसे अब बढ़ाकर 1200 रुपये कर दिया गया है। पीजी कोर्स करने वाले छात्रों से 300 रुपये लिए जाते थे। इनकी लाइब्रेरी सिक्योरिटी बढ़ाकर अब 1500 रुपये कर दी गई है।
सिक्योरिटी बढ़ाने से पूर्व सिर्फ कुलपति की मंजूरी ली गई है। प्रशासन सिक्योरिटी बढ़ाने के लिए लंबे समय से इसकी दरें न बढ़ाए जाने, रखरखाव और किताबों की सुरक्षा को इसे जरूरी होने का तर्क दे रहा है।
हालांकि, इक्डोल के पुस्तकालय की सेवाओं का लाभ सिर्फ शिमला और इसके आसपास क्षेत्र में रहने वाले छात्र ही उठा पाते हैं, मगर उनके लिए भी यह हजारों की सिक्योरिटी देना मुश्किल होगा। सिक्योरिटी को डिग्री या फिर इक्डोल से पढ़ाई पूरा करने के बाद ही रिफंड किया जाता है।
प्रोस्पेक्टस, सिक्योरिटी फार्म में अलग-अलग दरें
इक्डोल के पीजी और यूजी डिग्री कोर्स के छापे गए प्रोस्पेक्टस और लाइब्रेरी सिक्योरिटी फार्म में सिक्योरिटी की अलग-अलग दरें हैं। इससे प्रवेश लेने के बाद आने वाले छात्र असमंजस में हैं कि कौन सी दर को सही मानें। उन्हें पुस्तकालय में जाकर ही सही जानकारी मिल पा रही है।
सालों से नहीं बढ़ाई गई थीं दरें : निदेशक
इक्डोल निदेशक प्रो. प्रदीप कुमार वैद ने माना कि लाइब्रेरी सिक्योरिटी की दरें कुलपति की मंजूरी मिलने के बाद ही बढ़ाई गई हैं। इसके लिए वित्त कमेटी और ईसी की मंजूरी लेना अनिवार्य नहीं होता। इसे छात्रों को वापस कर दिया जाता है। किताबों को छात्र सही ढंग से इस्तेमाल करें, इसलिए सिक्योरिटी को बढ़ाया गया है। पिछले कई सालों से यह दरें नहीं बढ़ाई गई थीं।
अब पुस्तकालय की सुविधा का इस्तेमाल करने वाले छात्रों को हजारों में सिक्योरिटी जमा करवानी पड़ेगी। इक्डोल से यूजी कोर्स करने वाले छात्रों से पहले 200 रुपये लाइब्रेरी सिक्योरिटी ली जाती थी। इसे अब बढ़ाकर 1200 रुपये कर दिया गया है। पीजी कोर्स करने वाले छात्रों से 300 रुपये लिए जाते थे। इनकी लाइब्रेरी सिक्योरिटी बढ़ाकर अब 1500 रुपये कर दी गई है।
सिक्योरिटी बढ़ाने से पूर्व सिर्फ कुलपति की मंजूरी ली गई है। प्रशासन सिक्योरिटी बढ़ाने के लिए लंबे समय से इसकी दरें न बढ़ाए जाने, रखरखाव और किताबों की सुरक्षा को इसे जरूरी होने का तर्क दे रहा है।
हालांकि, इक्डोल के पुस्तकालय की सेवाओं का लाभ सिर्फ शिमला और इसके आसपास क्षेत्र में रहने वाले छात्र ही उठा पाते हैं, मगर उनके लिए भी यह हजारों की सिक्योरिटी देना मुश्किल होगा। सिक्योरिटी को डिग्री या फिर इक्डोल से पढ़ाई पूरा करने के बाद ही रिफंड किया जाता है।
प्रोस्पेक्टस, सिक्योरिटी फार्म में अलग-अलग दरें
इक्डोल के पीजी और यूजी डिग्री कोर्स के छापे गए प्रोस्पेक्टस और लाइब्रेरी सिक्योरिटी फार्म में सिक्योरिटी की अलग-अलग दरें हैं। इससे प्रवेश लेने के बाद आने वाले छात्र असमंजस में हैं कि कौन सी दर को सही मानें। उन्हें पुस्तकालय में जाकर ही सही जानकारी मिल पा रही है।
सालों से नहीं बढ़ाई गई थीं दरें : निदेशक
इक्डोल निदेशक प्रो. प्रदीप कुमार वैद ने माना कि लाइब्रेरी सिक्योरिटी की दरें कुलपति की मंजूरी मिलने के बाद ही बढ़ाई गई हैं। इसके लिए वित्त कमेटी और ईसी की मंजूरी लेना अनिवार्य नहीं होता। इसे छात्रों को वापस कर दिया जाता है। किताबों को छात्र सही ढंग से इस्तेमाल करें, इसलिए सिक्योरिटी को बढ़ाया गया है। पिछले कई सालों से यह दरें नहीं बढ़ाई गई थीं।
