आसाराम दुष्कर्म प्रकरण की पीड़िता ने घटना के 23 महीने बाद पहली दफा अपनी न्याय की लड़ाई की कमान खुद संभालने की पहल की है।
पीड़िता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर आसाराम के खिलाफ गवाही देने वाले लोगों की हत्या की सीबीआई जांच कराने की फरियाद की है। उसने अन्य गवाहों को सुरक्षा देने और उन पर हमले की भी सीबीआई से जांच कराने की मांग की है।
प्रधानमंत्री को रजिस्टर्ड डाक से भेजी चिट्ठी में पीड़िता ने कहा है कि आसाराम उर्फ आसुमल जब से जेल गया है तभी से उसके प्रकरण के गवाहों पर जानलेवा हमले शुरू हो गए।
तीन गवाहों की इन हमलों में मौत हो चुकी है जबकि छह गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। इन घटनाओं की वजह से कई गवाहों ने बयान देने से इन्कार कर दिया और कई ने डर के कारण बयान बदल दिए।
पीड़िता ने कहा है कि हाल ही में 10 जुलाई को गवाह कृपाल सिंह को गोली मारी गई और इलाज के दौरान 12 दिन पहले उनकी मौत भी हो गई। इस मामले में भी पुलिस कातिलों को नहीं पकड़ पाई। न पहले मुजफ्फरनगर में मारे गए गवाह अखिल गुप्ता और अमृत प्रजापति� के हत्यारों का पता चला। गवाह महेंद्र चावला को गोली मारने वालों का भी पता नहीं चला।
पत्र के अंत में पीड़िता ने अपने पिता के खिलाफ आसाराम के लोगों द्वारा कई जगह झूठे मुकदमे कराए जाने का उल्लेख किया है। लिखा है कि ऐसा इसलिए किया गया है ताकि वह परेशान हों और समझौता कर लें। न्याय दिलाने में प्रधानमंत्री से सहयोग की अपेक्षा के साथ उसने आखिर में अपना ब्योरा लिखा है।
पीड़िता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर आसाराम के खिलाफ गवाही देने वाले लोगों की हत्या की सीबीआई जांच कराने की फरियाद की है। उसने अन्य गवाहों को सुरक्षा देने और उन पर हमले की भी सीबीआई से जांच कराने की मांग की है।
प्रधानमंत्री को रजिस्टर्ड डाक से भेजी चिट्ठी में पीड़िता ने कहा है कि आसाराम उर्फ आसुमल जब से जेल गया है तभी से उसके प्रकरण के गवाहों पर जानलेवा हमले शुरू हो गए।
तीन गवाहों की इन हमलों में मौत हो चुकी है जबकि छह गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। इन घटनाओं की वजह से कई गवाहों ने बयान देने से इन्कार कर दिया और कई ने डर के कारण बयान बदल दिए।
पीड़िता ने कहा है कि हाल ही में 10 जुलाई को गवाह कृपाल सिंह को गोली मारी गई और इलाज के दौरान 12 दिन पहले उनकी मौत भी हो गई। इस मामले में भी पुलिस कातिलों को नहीं पकड़ पाई। न पहले मुजफ्फरनगर में मारे गए गवाह अखिल गुप्ता और अमृत प्रजापति� के हत्यारों का पता चला। गवाह महेंद्र चावला को गोली मारने वालों का भी पता नहीं चला।
पत्र के अंत में पीड़िता ने अपने पिता के खिलाफ आसाराम के लोगों द्वारा कई जगह झूठे मुकदमे कराए जाने का उल्लेख किया है। लिखा है कि ऐसा इसलिए किया गया है ताकि वह परेशान हों और समझौता कर लें। न्याय दिलाने में प्रधानमंत्री से सहयोग की अपेक्षा के साथ उसने आखिर में अपना ब्योरा लिखा है।
