Used to blackmail secret information, got 50-60 thousand every month/ ब्लैकमेल कर लेते थे गुप्त सूचनाएं, हर महीने आते थे 50 से 60 हजार

Swati
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आईएसआई जासूस रैकेट भंडाफोड़ मामले में एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पाक में बैठा आईएसआई हैडलर और कफायतउल्ला पहले पैसे देकर सूचना लेते थे। इसके बाद ब्लैकमेल कर गुप्त सूचनाएं और दस्तावेज लेते थे।

पुलिस ने कफायतउल्ला के कब्जे से एक सीडी और मैप बरामद किया है। पाक हैडलर ने कफायतउल्ला से मध्य प्रदेश स्थित शास्त्रागार का नक्शा मांगा था। कफायतउल्ला के कब्जे से यह नक्शा बरामद हुआ है।

कफायतउल्ला ने शास्त्रागार का मैप पाक हैडलर को दे दिया है, हालांकि� वह नहीं बता पा रहा है कि� पाक हैडलर की मंशा क्या है। शाखा के अधिकारियों के अनुसार, पाक हैडलर और कफायतउल्ला पहले पैसे देकर गोपनीय दस्तावेज लेते थे।

दोनों पैसे के लालच में बीएसएफ और सेना के जवानों को फंसा लेते थे। दोनों दस्तावेज देने वालों की रिकॉर्डिंग कर लेते थे। फिर सुरक्षा एजेंसियों और उनके अधिकारियों को बताने की धमकी देकर ब्लैकमेल कर सूचनाएं लेते रहते थे।

कफायतउल्ला के कब्जे से काफी रिकॉर्डिंग मिली है। पुलिस अधिकारी मान रहे हैं कि� आरोपियों ने इस तरह काफी लोगों की रिकॉर्डिंग कर रखी है। कफायतउल्ला के पास से अभी अब्दुल रशीद की रिकॉर्डिंग मिली है।

सीडी से पता चला है कि पाक हैडलर के निर्देश पर कफायतउल्ला अब्दुल रशीद से मध्य प्रदेश में शास्त्रागार का नक्शा मांगता है। कफायतउल्ला ने इसकी रिकॉर्डिंग कर रखी है। बताया जा रहा है कि शास्त्रागार की निगरानी बीएसएफ के पास है। यहां बीएसएफ की जी ब्रांच का काफी हस्तक्षेप है। रशीद जी शाखा में ही तैनात था।

कफायतउल्ला : मध्य प्रदेश स्थित शास्त्रागार का मैप, एंट्री प्वाइंट और घुसने के रास्ता का मैप चाहिए।
अब्दुल रशीद : मैप तो गूगल पर मिल जाएगा।
कफायतउल्ला : गूगल में शास्त्रागार के मैप को धुंधला किया हुआ है।
अब्दुल रशीद : शास्त्रागार के मैप का क्या करोगे।
कफायतउल्ला : ये शास्त्रागर प्रमुख है। इस पर हमला होने से भारत दो भागों में बंट जाएगा।
अब्दुल रशीद : अच्छा ठीक है, मैं कुछ करता है। इसके बाद रशीद नक्शे का जुगाड़ करता है।

भारत में मौजूद आईएसआई के एजेंट कफायतउल्ला के खाते में हर महीने काफी रकम आती थी। पुलिस के अनुसार, कफायतउल्ला के राजौरी स्थित जम्मू एंड कश्मीर बैंक और एचडीएफसी बैंक में खाते हैं। इनमें हर महीने 50 से 55 हजार रुपये आते थे।

पुलिस सूत्रों की मानें तो कफायतउल्ला इसमें से कुछ अपने पास रखने के अलावा गोपनीय दस्तावेज हासिल करने में लगाता था। बताया जा रहा है कि उसके खातों में दो साल से रुपये आ रहे थे।

पुलिस ने बैंक से डिटेल लेकर छानबीन कर रही है। पुलिस के अनुसार, इसके खातों में रकम पूर्वी एशिया के रास्ते होकर आती थी। इसकी भी जांच की जा रही है कि कभी पाकिस्तान से सीधे इसके खातों में रकम आई है या नहीं। कफायतउल्ला अपने कलाई गांव का पैसे वाला आदमी है। गांव में इसकी काफी इज्जत होती थी।

वहीं अपराध शाखा अधिकारियों के अनुसार, आईएसआई जासूस रैकेट में दार्जिलिंग का एक व्यक्ति भी शामिल था। यह भी गुप्त सूचनाएं दे रहा था। पुलिस का कहना है कि इसकी पहचान कर ली गई है। उसे जल्द ही पूछताछ के लिए लाया जाएगा।

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