पंजाब में कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बाजवा के इस्तीफा देने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह नए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हो सकते हैं।
बाजवा के अलावा कांग्रेस विधायक दल के नेता सुनील जाखड़ ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दोनों का इस्तीफा मंजूर कर लिया है।
पंजाब के प्रभारी कांग्रेस महासचिव शकील अहमद ने कहा है कि अगले दो दिनों में नए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का ऐलान हो जाएगा। बाजवा के इस्तीफे के बाद अब यह तय हो गया है कि पंजाब में कांग्रेस अगला विधानसभा चुनाव कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में लड़ेगी।
बाजवा के इस्तीफा देने के साथ ही लंबे समय से चल रहा पंजाब कांग्रेस के झगड़े पर भी विराम लग गया है। कैप्टन ने बाजवा को हटाने के लिए कांग्रेस हाईकमान पर पूरा दबाव बना दिया था। यहां तक कि पार्टी छोड़कर भाजपा या फिर अलग पार्टी बनाने की धमकी भी दे डाली थी।
बाजवा को राहुल का समर्थन था। मगर कैप्टन के अड़ने के चलते आखिरकार राहुल को मानना पड़ा। पंजाब कांग्रेस में बाजवा और अमरिंदर का घमासान बहुत तेज हो गया था।
दोनों नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर एक दूसरे पर कीचड़ भी उछाला था। सूत्रों का कहना है कि बाजवा को अपनी कुर्सी छोड़ने के बदले राज्यसभा भेजा जा सकता है। दूसरी तरफ पंजाब कांग्रेस की कमान कैप्टन के हाथ सौंपने की प्रबल संभावना है। मगर पार्टी सूत्र कह रहे है कि अमरिंदर को पार्टी मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने में अभी परहेज करेगी।
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कैप्टन को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था। मगर उसके बाद पार्टी में गुटबाजी बढ़ गई थी और पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था।
कैप्टन को अगर प्रदेश कांग्रेस की कमान दी जाती है तो उस स्थिति में उनके विरोधी नेता एकजुट होकर पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसी स्थिति भी पार्टी के लिए मुश्किल भरी हो सकती है।
बाजवा के अलावा कांग्रेस विधायक दल के नेता सुनील जाखड़ ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दोनों का इस्तीफा मंजूर कर लिया है।
पंजाब के प्रभारी कांग्रेस महासचिव शकील अहमद ने कहा है कि अगले दो दिनों में नए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का ऐलान हो जाएगा। बाजवा के इस्तीफे के बाद अब यह तय हो गया है कि पंजाब में कांग्रेस अगला विधानसभा चुनाव कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में लड़ेगी।
बाजवा के इस्तीफा देने के साथ ही लंबे समय से चल रहा पंजाब कांग्रेस के झगड़े पर भी विराम लग गया है। कैप्टन ने बाजवा को हटाने के लिए कांग्रेस हाईकमान पर पूरा दबाव बना दिया था। यहां तक कि पार्टी छोड़कर भाजपा या फिर अलग पार्टी बनाने की धमकी भी दे डाली थी।
बाजवा को राहुल का समर्थन था। मगर कैप्टन के अड़ने के चलते आखिरकार राहुल को मानना पड़ा। पंजाब कांग्रेस में बाजवा और अमरिंदर का घमासान बहुत तेज हो गया था।
दोनों नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर एक दूसरे पर कीचड़ भी उछाला था। सूत्रों का कहना है कि बाजवा को अपनी कुर्सी छोड़ने के बदले राज्यसभा भेजा जा सकता है। दूसरी तरफ पंजाब कांग्रेस की कमान कैप्टन के हाथ सौंपने की प्रबल संभावना है। मगर पार्टी सूत्र कह रहे है कि अमरिंदर को पार्टी मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने में अभी परहेज करेगी।
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कैप्टन को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया था। मगर उसके बाद पार्टी में गुटबाजी बढ़ गई थी और पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था।
कैप्टन को अगर प्रदेश कांग्रेस की कमान दी जाती है तो उस स्थिति में उनके विरोधी नेता एकजुट होकर पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसी स्थिति भी पार्टी के लिए मुश्किल भरी हो सकती है।
