Punjab kidney racket, sensational truth / पंजाब के किडनी रैकेट में काफी चौंकाने वाले खुलासे

Swati
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पंजाब के जालंधर में पकड़ी गई मानव अंगों की खरीदोफरोख्त में शनिवार को कई ऐसे चौंकाने वाले खुलासे हुए, सभी दंग रह गए। 
किडनी रैकेट में शहर के नेशनल किडनी अस्पताल का नाम सामने आ रहा है। पुलिस ने ब्लड सैंपल लेने वाले नामी पैथ लैब के टेक्नीशियन हरविंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही नेशनल किडनी अस्पताल के रिकॉर्ड को भी जब्त कर छानबीन शुरू कर दी गई है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि गिरोह ने छह लोगों की किडनी निकालकर आगे सौदा कराया था।

जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला है कि किडनी के इस खेल की जड़ें काफी गहरी हैं। जुवैद खान तो एक मोहरा था, उसकी किडनी भी पहले निकालकर बेची गई थी। इसके बाद से ही वह इस गोरखधंधे में शामिल हो गया और जालंधर में अच्छा-खासा संपर्क बना लिया। यहां पर वह लोगों को जाल में फंसाकर किडनी बेचने के लिए राजी कर लेता था फिर यही किडनी मोटी रकम लेकर आगे बेच दी जाती थी। एक किडनी की कीमत दस से पंद्रह लाख रुपये बताई जा रही है। जांच टीम की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने पुलिस को गलत नाम और पते बताए हैं। फिलहाल पड़ताल जारी है। 

जिन लोगों की किडनी निकाली गई, उनके नाम और पते क्या हैं 
किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले लोगों का ब्योरा 
नेशनल किडनी अस्पताल के कौन से लोग शामिल हैं रैकेट में 
फर्जी आधार कार्ड, बैंक कापियां, रिहायशी प्रमाण पत्र कहां से तैयार किए जाते थे 
जालसाजी के लिए कितनी रकम अदा की जाती थी।

ऑथोराइजेशन कमेटी जांच के घेरे में 
किडनी ट्रांसप्लांट ऑथोराइजेशन कमेटी में डिप्टी कमिश्नर की तरफ से एक अधिकारी, पुलिस प्रशासन की तरफ से एक अधिकारी, जिले का सिविल सर्जन, दो चिकित्सक या फिर एनजीओ को सदस्य व मेडिकल कॉलेज का प्रिंसिपल कमेटी का चेयरमैन होता है। सवाल यह है कि फर्जी दस्तावेजों को जांचा परखा ही नहीं गया और किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए हरी झंडी दे दी गई। 

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