दिल्ली सरकार के बजट में पास कृषि भूमि का सर्किल रेट वृद्धि के अधिसूचना पर उपराज्यपाल नजीब जंग ने रोक लगा दी है। यह अधिसूचना उपराज्यपाल की अनुमति लिए बिना दिल्ली सरकार ने जारी की थी। जबकि उपराज्यपाल नजीब जंब ने इस पर आपत्ति जता दी थी।
इससे पूर्व भी बिना अनुमति वाले दो दर्जन आदेश उपराज्यपाल रद्द कर चुके हैं। उपराज्यपाल ने प्रधान राजस्व सचिव को भेजे गए एक आदेश में कहा है कि सरकार की ओर से 4 अगस्त को कृषि योग्य भूमि पर जारी सर्किल रेट नोटिफिकेशन को लागू न करें।
आदेश में कहा कि वह इस मामले में अभी संवैधानिक सलाह ले रहे हैं। मामले की जांच जारी है। ऐसे में जब तक उपराज्यपाल की तरफ से अगला आदेश न आए तब तक सर्किल रेट नोटिफिकेशन लागू न करें।
यह भी साफ किया गया है कि उपराज्यपाल के आदेश के बिना अगर कोई कार्य किया जाता है तो सरकार, खरीद-बिक्री करने वालों को कानूनी पचड़े से उलझना पड़ सकता है।
उल्लेखनीय है कि 4 अगस्त को स्पेशल इंस्पेक्टर जनरल संजय कुमार की तरफ से जारी अधिसूचना में 11 जिलों में एक करोड़ रुपये से डेढ़ करोड़ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से कृषि भूमि का सर्किल रेट तय किया गया था।
इतना ही नहीं ऐसे गांव जो लैंड पुलिंग पॉलिसी में शामिल हैं, उनकी कृषि योग्य भूमि की कीमत प्रति एकड़ 2.25 करोड़ रुपये से 3.5 करोड़ रुपये तय की गई थी।
इससे पूर्व भी बिना अनुमति वाले दो दर्जन आदेश उपराज्यपाल रद्द कर चुके हैं। उपराज्यपाल ने प्रधान राजस्व सचिव को भेजे गए एक आदेश में कहा है कि सरकार की ओर से 4 अगस्त को कृषि योग्य भूमि पर जारी सर्किल रेट नोटिफिकेशन को लागू न करें।
आदेश में कहा कि वह इस मामले में अभी संवैधानिक सलाह ले रहे हैं। मामले की जांच जारी है। ऐसे में जब तक उपराज्यपाल की तरफ से अगला आदेश न आए तब तक सर्किल रेट नोटिफिकेशन लागू न करें।
सूत्र बताते हैं कि उपराज्यपाल की ओर से जारी आदेश की कॉपी मुख्यमंत्री कार्यालय, राजस्व मंत्री मनीष सिसोदिया के कार्यालय, मुख्य सचिव, गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव को भी भेजी गई है।
यह भी साफ किया गया है कि उपराज्यपाल के आदेश के बिना अगर कोई कार्य किया जाता है तो सरकार, खरीद-बिक्री करने वालों को कानूनी पचड़े से उलझना पड़ सकता है।
उल्लेखनीय है कि 4 अगस्त को स्पेशल इंस्पेक्टर जनरल संजय कुमार की तरफ से जारी अधिसूचना में 11 जिलों में एक करोड़ रुपये से डेढ़ करोड़ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से कृषि भूमि का सर्किल रेट तय किया गया था।
इतना ही नहीं ऐसे गांव जो लैंड पुलिंग पॉलिसी में शामिल हैं, उनकी कृषि योग्य भूमि की कीमत प्रति एकड़ 2.25 करोड़ रुपये से 3.5 करोड़ रुपये तय की गई थी।
