दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल वित्त वर्ष 2015-16 के लिए बिजली कीमत तय करने के लिए बुलाई गई जन-सुनवाई में हिस्सा लेंगे या नहीं यह अभी तय नहीं है।
आप सरकार डीईआरसी की कार्यप्रणाली से खुश नहीं है और पिछली बार जन सुनवाई में केजरीवाल ने आयोग के समक्ष बड़ी मजबूती से अपना पक्ष रखा था और कहा था कि बिजली कीमत नहीं बढ़ानी चाहिए।
अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद केजरीवाल या उनके प्रतिनिधि आयोग की ओर से बुलाई गई जन-सुनवाई में भाग लेते हैं या नहीं। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) ने चार और पांच अगस्त को जन सुनवाई बुलाई है।
इसमें कोई भी बिजली उपभोक्ता या संस्था अपनी बात रख सकता है और आयोग को सुझाव दे सकता है। वर्तमान में आप सरकार और आयोग के बीच सबकुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है।
ऐसे में आयोग की ओर से बुलाई गई बैठक में आप सरकार भाग लेती है या नहीं यह अभी तय नहीं है। संभावना जताई जा रही है कि आप की सरकार सीधे तौर पर जन सुनवाई में भाग नहीं लेगी।
लेकिन संभव है आप के नेता इसमें भाग लें और सरकार पिछले दरवाजे से अपनी बात आयोग के सामने रखे। यही नहीं बिजली कंपनियों पर भी लगाम लगाने की कोशिश करेगी कि ताकि जनसुनवाई के दौरान डिस्कॉम्स अपना मुंह बंद ही रखे।
दरअसल आप सरकार नहीं चाहती है कि बिना सीएजी ऑडिट रिपोर्ट आए दिल्ली में बिजली कीमत बढ़ाई जाएं, वहीं दूसरी ओर डिस्कॉम्स आयोग पर दबाव बना रही है कि उसका घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है लिहाजा बिजली कीमत बढ़ाई जाए।
डिस्कॉम्स का कहना है कि बिजली का घाटा करीब 28000 करोड़ तक पहुंच चुका है। ऐसे में यदि बिजली कीमत नहीं बढ़ाई जाती तब बिजली आपूर्ति कर पाना भी मुश्किल होगा।
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वहीं, बिजली कीमत नहीं घटने की वजह से आप के वादे के अनुसार सरकार को सालाना करीब 1400 करोड़ रुपये की सब्सिडी देनी पड़ रही है। इसकी वजह से सरकारी खजाने पर असर पड़ रहा है और विपक्षी दल भी केजरीवाल सरकार को निशाने पर ले रहे हैं।
प्रति माह 400 यूनिट से अधिक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ता भी उम्मीद लगाए हैं कि उन्हें केजरीवाल के वादे के अनुसार कब 50 फीसदी कम दर पर बिजली मिलेगी।
आप सरकार डीईआरसी की कार्यप्रणाली से खुश नहीं है और पिछली बार जन सुनवाई में केजरीवाल ने आयोग के समक्ष बड़ी मजबूती से अपना पक्ष रखा था और कहा था कि बिजली कीमत नहीं बढ़ानी चाहिए।
अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद केजरीवाल या उनके प्रतिनिधि आयोग की ओर से बुलाई गई जन-सुनवाई में भाग लेते हैं या नहीं। दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) ने चार और पांच अगस्त को जन सुनवाई बुलाई है।
इसमें कोई भी बिजली उपभोक्ता या संस्था अपनी बात रख सकता है और आयोग को सुझाव दे सकता है। वर्तमान में आप सरकार और आयोग के बीच सबकुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है।
ऐसे में आयोग की ओर से बुलाई गई बैठक में आप सरकार भाग लेती है या नहीं यह अभी तय नहीं है। संभावना जताई जा रही है कि आप की सरकार सीधे तौर पर जन सुनवाई में भाग नहीं लेगी।
लेकिन संभव है आप के नेता इसमें भाग लें और सरकार पिछले दरवाजे से अपनी बात आयोग के सामने रखे। यही नहीं बिजली कंपनियों पर भी लगाम लगाने की कोशिश करेगी कि ताकि जनसुनवाई के दौरान डिस्कॉम्स अपना मुंह बंद ही रखे।
दरअसल आप सरकार नहीं चाहती है कि बिना सीएजी ऑडिट रिपोर्ट आए दिल्ली में बिजली कीमत बढ़ाई जाएं, वहीं दूसरी ओर डिस्कॉम्स आयोग पर दबाव बना रही है कि उसका घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है लिहाजा बिजली कीमत बढ़ाई जाए।
डिस्कॉम्स का कहना है कि बिजली का घाटा करीब 28000 करोड़ तक पहुंच चुका है। ऐसे में यदि बिजली कीमत नहीं बढ़ाई जाती तब बिजली आपूर्ति कर पाना भी मुश्किल होगा।
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वहीं, बिजली कीमत नहीं घटने की वजह से आप के वादे के अनुसार सरकार को सालाना करीब 1400 करोड़ रुपये की सब्सिडी देनी पड़ रही है। इसकी वजह से सरकारी खजाने पर असर पड़ रहा है और विपक्षी दल भी केजरीवाल सरकार को निशाने पर ले रहे हैं।
प्रति माह 400 यूनिट से अधिक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ता भी उम्मीद लगाए हैं कि उन्हें केजरीवाल के वादे के अनुसार कब 50 फीसदी कम दर पर बिजली मिलेगी।
