80 percent builders are defaulters So how do you get flat / 80% बिल्डर हैं डिफॉल्टर तो कैसे मिलेगा फ्लैट?

Swati
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ओखला पक्षी विहार से दायरा तय होने पर एनजीटी से तो राहत मिल जाएगी, मगर प्रोजेक्टों के कंपलीशन की राह में रोड़े और भी हैं, जिनमें सबसे बड़ा रोड़ा प्राधिकरण के बकाया भुगतान का है, जिसकी वजह से ज्यादातर बिल्डर डिफॉल्टर हो चुके हैं।

नोएडा के बिल्डरों पर लगभग 20,000 करोड़ रुपये बकाया है। यह बकाया ग्रुप हाउसिंग भूखंड लेने के एवज में है। बिल्डर भुगतान नहीं कर पा रहे, जिससे 80 फीसदी से ज्यादा बिल्डर डिफॉल्टर की श्रेणी में आ चुके हैं।
कई बिल्डरों पर तीन से ज्यादा किस्त बकाया होने के कारण 19 फीसदी की दर से ब्याज भी चढ़ रहा है। प्राधिकरण के नोटिस पर भी भुगतान नहीं कर रहे। ओखला पक्षी विहार से दस किलोमीटर के दायरे में आने वाले 40 से अधिक बिल्डर की भी यही स्थिति है। इन पर प्राधिकरण की कई किस्तें बाकी हैं।


दरअसल, प्राधिकरण बिल्डरों से भूखंड की कुल कीमत का दस फीसदी भुगतान लेकर आवंटन कर देता है। बाकी भुगतान आठ साल में 16 किस्तों में देना होता है।


मगर लीज में ही इस बात का भी प्रावधान है कि उस भूखंड पर बनने वाले प्रोजेक्ट को प्राधिकरण तब कंपलीशन देगा जब पूरा भुगतान मिल जाएगा। यानी बिल्डरों को अब तक का बकाया देने के साथ ही बाकी किस्तें भी जमा करानी होगी।

उसके बाद ही प्राधिकरण कंपलीशन देगा। बिल्डरों के लिए पूरा भुगतान करना इतना आसान नहीं है। कुछ बिल्डर तो ऐसे भी हैं, जिन्होंने फ्लैट खरीदारों से पूरा भुगतान तो ले लिया है, मगर प्राधिकरण का पैसा नहीं जमा किया है।

प्राधिकरण से जानकारी के मुताबिक 19 बिल्डर ऐसे हैं, जिन्होंने कंपलीशन के लिए आवेदन भी कर रखा है। एनजीटी से मामला साफ होने के बाद इन सभी को कंपलीशन दिया जाना है।

ये प्रोजेक्ट सेक्टर-45, 46, 50, 52, 70, 75, 76, 77, 78, 100, 107, 108, 119, 120, 121 आदि में स्थित हैं। इसी तरह सेक्टर-16, 16ए, 94 आदि में स्थित मिश्रित उपयोग और व्यावसायिक संपत्तियों का कंपलीशन भी अटक सकता है।

बता दें, कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने ओखला पक्षी विहार के तीन तरफ 100 मीटर और एक तरफ 1.27 किलोमीटर को ईको सेंसिटिव जोन तय करते हुए एक सप्ताह में अधिसूचना जारी करने की बात कही है।

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