पश्चिम बंगाल के नदिया जिले की मौमिता सरकार अब बेहद खुश है। 12वीं की परीक्षा में 72 फीसदी नंबर हासिल करने के बाद वह आगे पढ़ना चाहती थी, लेकिन उसके किसान पिता ने पढ़ाई का खर्च देने से इंकार करते हुए उम्र में उससे कोई 18 साल बड़े एक व्यक्ति से उसकी शादी तय कर दी। इसके विरोध में मौमिता ने अपना घर छोड़ दिया।
इस विवाद में कृष्णनगर महिला कॉलेज में दाखिले की तारीख निकल गई। मौमिता की आगे पढ़ने की अपील पर अतिरिक्त जिलाशासक उत्पल भद्र ने कॉलेज के प्रिंसिपल मानवी बनर्जी को पत्र लिखा।
मानवी ने यह मुद्दा कल्याणी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर को पत्र लिखकर बताया। आखिर वाइस चांसलर ने बृहस्पतिवार को मौमिता को दाखिले की अनुमति दे दी। यह सूचना मिलने के बाद मौमिता की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा।
चांसलर ने कहा कि हम महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं। इसीलिए मौमिता को दाखिले की तारीख निकल जाने के बावजूद दाखिला लेने की अनुमति दी गई है।
चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी मौमिता ने कहा कि उसके लिए यह एक बड़ी खबर है। मैंने शादी करने से इंकार कर दिया था। वह आगे पढ़ना चाहती थी, लेकिन परिवार बड़ा होने के कारण पिता ने खर्च उठाने से मना कर दिया और शादी तय कर दी।
पहले उसके होने वाले पति ने उसकी पढ़ाई का खर्च उठाने का भरोसा दिया था, लेकिन बाद में वह भी इससे मुकर गया। इसके बाद ही मौमिता ने घर से भागने का फैसला किया।
उसकी एक महिला मित्र उसे लेकर अतिरिक्त जिला शासक उत्पल के पास ले गई। अब जिला प्रशासन ने मौमिता और उसकी मित्र के महिला छात्रावास में रहने की व्यवस्था कर दी है।
अब उसकी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए प्रायोजक की तलाश चल रही है। दूसरी ओर, मौमिता कहती है कि वह ट्यूशन के जरिये अपनी पढ़ाई का कुछ खर्च उठाने के लिए भी तैयार है। उसका कहना है कि शिक्षिका बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए वह कड़ी मेहनत करने से भी पीछे नहीं हटेगी।
इस विवाद में कृष्णनगर महिला कॉलेज में दाखिले की तारीख निकल गई। मौमिता की आगे पढ़ने की अपील पर अतिरिक्त जिलाशासक उत्पल भद्र ने कॉलेज के प्रिंसिपल मानवी बनर्जी को पत्र लिखा।
मानवी ने यह मुद्दा कल्याणी विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर को पत्र लिखकर बताया। आखिर वाइस चांसलर ने बृहस्पतिवार को मौमिता को दाखिले की अनुमति दे दी। यह सूचना मिलने के बाद मौमिता की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा।
चांसलर ने कहा कि हम महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं। इसीलिए मौमिता को दाखिले की तारीख निकल जाने के बावजूद दाखिला लेने की अनुमति दी गई है।
चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी मौमिता ने कहा कि उसके लिए यह एक बड़ी खबर है। मैंने शादी करने से इंकार कर दिया था। वह आगे पढ़ना चाहती थी, लेकिन परिवार बड़ा होने के कारण पिता ने खर्च उठाने से मना कर दिया और शादी तय कर दी।
पहले उसके होने वाले पति ने उसकी पढ़ाई का खर्च उठाने का भरोसा दिया था, लेकिन बाद में वह भी इससे मुकर गया। इसके बाद ही मौमिता ने घर से भागने का फैसला किया।
उसकी एक महिला मित्र उसे लेकर अतिरिक्त जिला शासक उत्पल के पास ले गई। अब जिला प्रशासन ने मौमिता और उसकी मित्र के महिला छात्रावास में रहने की व्यवस्था कर दी है।
अब उसकी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए प्रायोजक की तलाश चल रही है। दूसरी ओर, मौमिता कहती है कि वह ट्यूशन के जरिये अपनी पढ़ाई का कुछ खर्च उठाने के लिए भी तैयार है। उसका कहना है कि शिक्षिका बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए वह कड़ी मेहनत करने से भी पीछे नहीं हटेगी।
