1993 के मुंबई बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन को गुरुवार सुबह फांसी दे दी गई। याकूब को यरवदा जेल के उसी कांस्टेबल ने फांसी पर लटकाया जिसने तीन साल पहले पाकिस्तानी आतंकी और मुंबई में हुए 26/11 के आतंकी हमले में शामिल अजमल कसाब को फांसी दी थी।
सुरक्षा कारणों से फांसी देने वाले शख्स की पहचान गुप्त रखी गई है। वह एक हफ्ते पहले पुणे की यरवदा जेल से नागपुर सेंट्रल जेल पहुंचा था। यरवदा जेल से 20 लोगों की टीम इस फांसी की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए नागपुर जेल पहुंची थी।
इसी कांस्टेबल ने 21 नबंबर 2012 को यरवदा जेल में कसाब को फांसी पर लटकाए जाने के दौरान लीवर खींचा था।
याकूब की फांसी के मद्देनजर पुणे की यरवदा जेल में कसाब को फांसी देने वाली टीम की अगुवाई करने वाले जेल अधीक्षक योगेश देसाई का कुछ महीने पहले नागपुर सेंट्रल जेल तबादला कर दिया गया था।
जेल के अधिकारियों ने बताया कि यरवदा जेल से एक और कांस्टेबल को एक हफ्ते पहले यहां लाया गया था। उन्हें दो अन्य के साथ जल्लाद को सहयोग करने का प्रशिक्षण दिया गया था।
इन दोनों लोगों का काम फांसी की तैयारी करना और उसके लिए प्लेटफार्म बनाना था। महाराष्ट्र में यरवदा और नागपुर ही दो केंद्रीय कारागार हैं, जहां फांसी देने की सुविधा है। नागपुर जेल में पिछली फांसी 1984 में दी गई थी। तब अमरावती के दो भाइयों को सूली पर चढ़ाया गया था।
सुरक्षा कारणों से फांसी देने वाले शख्स की पहचान गुप्त रखी गई है। वह एक हफ्ते पहले पुणे की यरवदा जेल से नागपुर सेंट्रल जेल पहुंचा था। यरवदा जेल से 20 लोगों की टीम इस फांसी की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए नागपुर जेल पहुंची थी।
इसी कांस्टेबल ने 21 नबंबर 2012 को यरवदा जेल में कसाब को फांसी पर लटकाए जाने के दौरान लीवर खींचा था।
याकूब की फांसी के मद्देनजर पुणे की यरवदा जेल में कसाब को फांसी देने वाली टीम की अगुवाई करने वाले जेल अधीक्षक योगेश देसाई का कुछ महीने पहले नागपुर सेंट्रल जेल तबादला कर दिया गया था।
जेल के अधिकारियों ने बताया कि यरवदा जेल से एक और कांस्टेबल को एक हफ्ते पहले यहां लाया गया था। उन्हें दो अन्य के साथ जल्लाद को सहयोग करने का प्रशिक्षण दिया गया था।
इन दोनों लोगों का काम फांसी की तैयारी करना और उसके लिए प्लेटफार्म बनाना था। महाराष्ट्र में यरवदा और नागपुर ही दो केंद्रीय कारागार हैं, जहां फांसी देने की सुविधा है। नागपुर जेल में पिछली फांसी 1984 में दी गई थी। तब अमरावती के दो भाइयों को सूली पर चढ़ाया गया था।