भारतीय राजनीति में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच मन-मुटाव और खींचतान होने कोई नई बात नहीं है, लेकिन दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने इस लड़ाई को नए तरीके से लड़ने की कवायद शुरु कर दी है।
आप ने देश की राजधानी में सीधे प्रधानमंत्री को इंगित करने वाले पोस्टर लगाए गए हैं जिसमें मांग की गई है कि प्लीज! दिल्ली सरकार को काम करने दीजिए। दिल्ली सरकार ठीक काम कर रही है।
असल में केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच की यह लड़ाई अब पोस्टर वार में तब्दील हो चुकी है जिसकी शुरुआत का श्रेय दिल्ली में महिला आयोग की अध्यक्ष पद पर स्वाति मालिवाल की नियुक्ति से शुरु हुआ।
23 जुलाई को एलजी नजीब जंग ने दिल्ली सरकार द्वारा नियुक्त महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालिवाल की नियुक्ति को अवैध करार दे दिया था।
इस मामले के तूल पकड़ने के बाद केजरीवाल ने बृहस्पतिवार को एलजी को एक चिट्ठी लिखते हुए कहा मांग की थी कि महिला अयोग की लड़ाई को अहम की लड़ाई में न बदलें और स्वाति की नियुक्ति को मंजूरी दे दें।
इस पत्र में केजरीवाल ने यह भी लिखा प्रधानमंत्री जी आप जीते और हम सब हार गए। लेटर में एलजी से मांग की गई कि महिला आयोग का काम अतिसंवेदनशील है इसलिए स्वाति की नियुक्ति को मंजूरी प्रदान कर दें।
हालांकि दो दिन पहले दिल्ली के डिप्टी सीएम केजरीवाल ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर केंद सरकार पर आरोप लगाया था कि केंद सरकार के अधीन सीबीआई और ईडी के विभाग हैं।
सरकार इन दो संस्थाओं को तो संभाल नहीं पा रही है उल्टा अब वह दिल्ली की एंटी करप्शन ब्यूरो को भी अपने नियंत्रण में करना चाहती है।
मनीष सिसोदिया ने यह आरोप भी लगाया था कि दिल्ली में चुनाव के बाद से एंटी करप्शन ब्यूरो सक्रीय ढंग से काम कर रहा था और भ्रष्ट लोगों के खिलाफ तेजी से कार्यवाही कर रहा था।
लेकिन इस दौरान केंद्र सरकार को यह सूचना मिली कि एसीबी केंद्र सरकार के किसी मंत्री के खिलाफ भी कार्यवाई करने वाली है।
इसके तुरंत बाद रातों-रात एसीबी चीफ एसएस यादव की जगह एमके मीणा को इसका चीफ नियुक्त कर दिया गया। इसके बाद से ही दिल्ली का एंटी करप्शन ब्यूरो पूरी तरह से निष्क्रिय हो गया है।
हाल ही में दिल्ली के आनंद पर्बत इलाके में एक 19 वर्षीय युवती की निर्मम हत्या के मामले में भी दिल्ली सरकार ने प्रधानमंत्री को निशाना बनाते हुए उनसे मांग की थी कि वह रोज कम से कम एक घंटा दिल्ली की कानून व्यवस्था को दें।
इस अपील में केजरीवाल ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा था कि यह तानाशाही पूर्ण ढंग से काम कर रही है क्योंकि न तो यह दिल्ली सरकार के नियंत्रण में है और न ही प्रधानमंत्री के पास इसे नियंत्रित करने का समय है।
हालांकि इस बयान के बाद दिल्ली पुलिस कमीश्नर बीएस बस्सी ने केजरीवाल के बयान और इस पर बनाए गए टीवी एड को आपत्तिजनक कहा था।
आप ने देश की राजधानी में सीधे प्रधानमंत्री को इंगित करने वाले पोस्टर लगाए गए हैं जिसमें मांग की गई है कि प्लीज! दिल्ली सरकार को काम करने दीजिए। दिल्ली सरकार ठीक काम कर रही है।
असल में केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच की यह लड़ाई अब पोस्टर वार में तब्दील हो चुकी है जिसकी शुरुआत का श्रेय दिल्ली में महिला आयोग की अध्यक्ष पद पर स्वाति मालिवाल की नियुक्ति से शुरु हुआ।
23 जुलाई को एलजी नजीब जंग ने दिल्ली सरकार द्वारा नियुक्त महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालिवाल की नियुक्ति को अवैध करार दे दिया था।
इस मामले के तूल पकड़ने के बाद केजरीवाल ने बृहस्पतिवार को एलजी को एक चिट्ठी लिखते हुए कहा मांग की थी कि महिला अयोग की लड़ाई को अहम की लड़ाई में न बदलें और स्वाति की नियुक्ति को मंजूरी दे दें।
इस पत्र में केजरीवाल ने यह भी लिखा प्रधानमंत्री जी आप जीते और हम सब हार गए। लेटर में एलजी से मांग की गई कि महिला आयोग का काम अतिसंवेदनशील है इसलिए स्वाति की नियुक्ति को मंजूरी प्रदान कर दें।
हालांकि दो दिन पहले दिल्ली के डिप्टी सीएम केजरीवाल ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर केंद सरकार पर आरोप लगाया था कि केंद सरकार के अधीन सीबीआई और ईडी के विभाग हैं।
सरकार इन दो संस्थाओं को तो संभाल नहीं पा रही है उल्टा अब वह दिल्ली की एंटी करप्शन ब्यूरो को भी अपने नियंत्रण में करना चाहती है।
मनीष सिसोदिया ने यह आरोप भी लगाया था कि दिल्ली में चुनाव के बाद से एंटी करप्शन ब्यूरो सक्रीय ढंग से काम कर रहा था और भ्रष्ट लोगों के खिलाफ तेजी से कार्यवाही कर रहा था।
लेकिन इस दौरान केंद्र सरकार को यह सूचना मिली कि एसीबी केंद्र सरकार के किसी मंत्री के खिलाफ भी कार्यवाई करने वाली है।
इसके तुरंत बाद रातों-रात एसीबी चीफ एसएस यादव की जगह एमके मीणा को इसका चीफ नियुक्त कर दिया गया। इसके बाद से ही दिल्ली का एंटी करप्शन ब्यूरो पूरी तरह से निष्क्रिय हो गया है।
हाल ही में दिल्ली के आनंद पर्बत इलाके में एक 19 वर्षीय युवती की निर्मम हत्या के मामले में भी दिल्ली सरकार ने प्रधानमंत्री को निशाना बनाते हुए उनसे मांग की थी कि वह रोज कम से कम एक घंटा दिल्ली की कानून व्यवस्था को दें।
इस अपील में केजरीवाल ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा था कि यह तानाशाही पूर्ण ढंग से काम कर रही है क्योंकि न तो यह दिल्ली सरकार के नियंत्रण में है और न ही प्रधानमंत्री के पास इसे नियंत्रित करने का समय है।
हालांकि इस बयान के बाद दिल्ली पुलिस कमीश्नर बीएस बस्सी ने केजरीवाल के बयान और इस पर बनाए गए टीवी एड को आपत्तिजनक कहा था।
