पाकिस्तान में 'जिहाद' के नाम पर फंड जुटाने की इजाजत नहीं, यह देशद्रोह: लाहौर उच्च न्यायालय

Swati
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पाकिस्तान में 'जिहाद' के नाम पर फंड जुटाने की इजाजत नहीं, यह देशद्रोह: लाहौर उच्च न्यायालय
Jan 27th 2022, 12:56, by News24

पाकिस्तान के लाहौर उच्च न्यायालय ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि जिहाद के नाम पर धन चुटाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। लाहौर उच्च न्यायालय ने एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन के लिए धन जुटाने के लिए दोषी ठहराए गए दो आतंकवादियों की अपील खारिज करते हुए फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा, 'पाकिस्तान में व्यक्तियों या किसी भी संगठन को 'जिहाद' के लिए धन जुटाने के लिए जनता को उकसाने की अनुमति नहीं है और इसे देशद्रोह माना जाता है।'

अदालत का फैसला बुधवार को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादियों, मुहम्मद इब्राहिम और उबैदुर रहमान की अपील पर आया, जिन्हें लाहौर से लगभग 200 किलोमीटर दूर सरगोधा में गिरफ्तार किया गया था।...और इस महीने की शुरुआत में आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए आतंकवाद विरोधी अदालत द्वारा दोनों को पांच-पांच साल की कैद की सजा सुनाई गई है।

न्यायमूर्ति अली बकार नजफी की अध्यक्षता वाली दो-न्यायाधीशों की पीठ ने अपीलों को खारिज करते हुए कहा, 'इस्लामिक राज्य (पाकिस्तान) में व्यक्तियों या किसी भी संगठन को 'जिहाद' के लिए धन जुटाने के लिए जनता को उकसाने की अनुमति नहीं है क्योंकि इसे देशद्रोह माना जाता है।' कहा कि यदि पैसे जोड़ना आवश्यक हो भी तो राष्ट्रीय धन एकत्र करना राज्य का काम है। इसका जिम्मा कोई व्यक्ति या कोई संगठन नहीं उठा सकता।

अदालत ने कहा कि टीटीपी एक निष्क्रिय और प्रतिबंधित संगठन है जिसने न केवल राज्य संस्थानों को नुकसान पहुंचाया है और राज्य के उच्च पदाधिकारियों को निशाना बनाया है बल्कि अतीत में देश में आतंकवादी मामलों में तेज लाया है, जो वित्तीय सहायता के बिना संभव नहीं होता।

जमात-उद-दावा (JuD) के मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को भी कई वर्षों से 'आतंक के वित्तपोषण' का दोषी ठहराया गया है और वह लाहौर की कोट लखपत जेल में अपनी सजा काट रहा है। 71 वर्षीय कट्टरपंथी मौलवी और संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादी, जिस पर अमेरिका ने 10 मिलियन अमरीकी डालर का इनाम रखा है, को आतंकवाद के वित्तपोषण के पांच मामलों में 36 साल की कैद की सजा सुनाई गई है।

बता दें कि सईद के नेतृत्व वाला जमात-उद-दावा से लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) है, जो 2008 के मुंबई हमले को अंजाम देने के लिए जिम्मेदार है, जिसमें छह अमेरिकियों सहित 166 लोग मारे गए थे। जमात-उद-दावा 'कश्मीर जिहाद' के लिए लोगों से चंदा जुटाने में भी शामिल था।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने सईद को नामित वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित किया है। उसे दिसंबर 2008 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 के तहत सूचीबद्ध किया गया था।

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